(संशाेधित) वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में आ गई है असम साहित्य सभा : परमानंद राजबंशी
(संशाेधित- फाेटाे में बदलाव के साथ) गुवाहाटी, 18 मई, (हि.स.)। असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक परमानंद राजबंशी ने सभा के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार गोस्वामी के विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है
भाजपा विधायक परमानंद राजबंशी (फाइल फाेटाे)


(संशाेधित- फाेटाे में बदलाव के साथ)

गुवाहाटी, 18 मई, (हि.स.)। असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक परमानंद राजबंशी ने सभा के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार गोस्वामी के विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

परमानंद राजबंशी ने आरोप लगाया कि साहित्य सभा अब वामपंथी विचारधारा वाले बुद्धिजीवियों के प्रभाव में आ चुकी है। उन्होंने डॉ. बसंत कुमार गोस्वामी से असम की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति को समझने तथा वास्तविकता के धरातल पर लौटने की अपील की।

उल्लेखनीय है कि, डॉ. गोस्वामी ने कथित तौर पर कहा है कि यदि चर-चापोरी क्षेत्रों के मुसलमान जनगणना में सहयोग नहीं करते हैं तो असमिया लोगों का अपने ही राज्य में “द्वितीय श्रेणी का नागरिक” बन जाना “100 प्रतिशत निश्चित” हो जाएगा। उनके इस बयान के बाद राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

राजबंशी ने कहा कि साहित्य और संस्कृति से जुड़े प्रतिष्ठित संगठनों के पदाधिकारियों को संवेदनशील विषयों पर बयान देते समय संयम बरतना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि असम साहित्य सभा जैसी संस्था को किसी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर समावेशी असमिया समाज के हित में कार्य करना चाहिए।

डॉ. गोस्वामी के बयान के बाद राज्य में पहचान, जनसांख्यिकीय बदलाव और सांस्कृतिक संगठनों की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी