श्रम के सम्मान से पूरा होगा विकसित भारत का स्वप्न
गिरीश्वर मिश्र श्रम और उत्पादकता के मध्य अनिवार्य रिश्ते के चलते श्रम पर वर्चस्व स्थापित करने और अपने हित में करने की जद्दोजहद लम्बे समय से चलती चली आ रही है। दास, दस्यु, भृत्य, बेगार और मज़दूर के रूप में समाज के कुछ हिस्से पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंचित और

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