उबलती धरती, डगमगाती थाली
- डॉ. सत्यवान सौरभ जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल मौसमी विचलन नहीं रह गई है; यह एक गहरे संरचनात्मक संकट के रूप में उभर रही है, जो वैश्विक खाद्य प्रणालियों की बुनियाद को हिला रही है। बढ़ते तापमान और तीव्र होती हीटवेव्स ने

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