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भीलवाड़ा, 03 अक्टूबर (हि.स.)। मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करने की मांग अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने की है। भीलवाड़ा में आयोजित संगठन के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया।
बैठक के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने प्रस्ताव की जानकारी दी।
सत्येंद्र सिंह ने कहा कि 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ धाम में अंग्रेजी शासन द्वारा किया गया गोलीकांड जनजातीय समाज के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है। उनके अनुसार वागड़ क्षेत्र के संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ में कार्रवाई की थी, जिसमें बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चों के मारे जाने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पहले हुई थी।
उन्होंने कहा कि गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने अंग्रेजी शासन के दमनकारी कानूनों के विरुद्ध जनजागरण के साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों को भी जागृत किया। मानगढ़ की घटना के बाद राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की चेतना और व्यापक हुई।
कल्याण आश्रम की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानी जनजातीय समाज को श्रद्धांजलि दी थी। वहीं राष्ट्रपति ने भी 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानियों को नमन किया था।
संगठन ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की सिफारिश कर चुका है।
संगठन ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के साथ इसके ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास कार्य कराने की मांग की। साथ ही राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से विद्यालयों एवं महाविद्यालयों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने का आग्रह किया गया।
केंद्रीय कार्यकारी मंडल ने सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं तथा जनप्रतिनिधियों से भी इस विषय पर सभी मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
पत्रकार वार्ता में कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत और राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर मौजूद रहे।
कल्याण आश्रम की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 30 सितंबर को संपन्न हुई। इसके बाद 2 और 3 अक्टूबर को भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में देशभर के प्रांत पदाधिकारियों की व्यापक बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें 300 से अधिक पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित