जीएसटी चोरी नेटवर्क के चार अंतर्राज्यीय शातिर गिरफ्तार
नोएडा, 09 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जीएसटी चोरी के अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। एसटीएफ ने विभिन्न राज्यों और प्रदेश के कई जनपदों में बोगस फर्मों का पंजीकरण कर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिये 100 करोड़ र
जीएसटी चोरी नेटवर्क के चार अंतर्राज्यीय बदमाश गिरफ्तार


नोएडा, 09 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जीएसटी चोरी के अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। एसटीएफ ने विभिन्न राज्यों और प्रदेश के कई जनपदों में बोगस फर्मों का पंजीकरण कर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिये 100 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित बोगस फर्मों के माध्यम से वास्तविक फर्मों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेचते थे। इस प्रक्रिया में वास्तविक फर्मों द्वारा 30 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई। वहीं गिरोह की ओर से संचालित कुल लेन-देन से लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व क्षति की बात सामने आई है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस (39) निवासी दिल्ली, जितेन्द्र झा (26) निवासी समस्तीपुर बिहार, पुनीत अग्रवाल (26) निवासी पश्चिम दिल्ली और शिवम (25) निवासी विजय एन्क्लेव नई दिल्ली के रूप में हुई है। गिरोह का मास्टरमाइंड हरदीप सिंह है। वह नई दिल्ली में अकाउंटेंसी से जुड़े कार्य करता था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, नौ मोबाइल, तीन आधार कार्ड और 50,840 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़ी संख्या में ई-मेल आईडी, जीएसटी पोर्टल लॉग-इन डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।

एसटीएफ नोएडा यूनिट के एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों को शुक्रवार को एसटीएफ फील्ड यूनिट नोएडा कार्यालय में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले एसटीएफ की टीम को 8 जनवरी को बोगस फर्मों के जरिये फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि हरदीप सिंह अपने सहयोगियों जितेन्द्र झा, पुनीत अग्रवाल, आलोक अग्रवाल और शिवम के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था। इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए जाते थे। जिसके आधार पर फर्जी ई-वे बिल बनाकर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे। वास्तविक फर्मों के मालिक अपना जीएसटी नंबर, माल या सेवा का विवरण, मात्रा और कीमत की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से हरदीप सिंह को भेजते थे। इसके बाद गिरोह द्वारा बोगस फर्मों के नाम से इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया जाता था और संबंधित वास्तविक फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया जाता था।

फर्जी लेन-देन को वास्तविक दिखाने के लिए बोगस फर्मों और वास्तविक फर्मों के बीच बैंक खातों के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर दिखाई जाती थी। इसके बाद उस राशि को कैश या सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिये वापस निकाल लिया जाता था। अभियुक्तों के पास विभिन्न फर्मों की लॉग-इन आईडी, पासवर्ड और मोबाइल नंबर होते थे, जिससे वे ओटीपी प्राप्त कर आसानी से बैंक ट्रांजैक्शन और जीएसटी रिटर्न फाइलिंग कर लेते थे। उन्होंने बताया कि एसटीएफ की जांच मे पता चला है कि आरोपियों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों के पते पर दर्जनों बोगस फर्में पंजीकृत कराई थीं। मोबाइल फोन की जांच में 30 से अधिक ई-मेल आईडी मिली हैं।

गिरोह के खिलाफ जीएसटी विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहले से कई अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। इसी क्रम में थाना कविनगर सिटी जोन, गाजियाबाद में पंजीकृत संबंधित विवेचना में एसटीएफ से तकनीकी और अभियानी सहयोग मांगा गया था। महेश इंटरप्राइजेज नामक फर्म से जुड़े मामले के अनावरण में एसटीएफ की भूमिका अहम रही। एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की आगे की विवेचना स्थानीय विवेचक द्वारा की जा रही है। जबकि एसटीएफ तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में सहयोग जारी रखेगी। जांच के दौरान और भी बोगस फर्मों, लाभार्थी वास्तविक फर्मों तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी