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नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। प्रख्यात पर्यावरणविद माधव गाडगिल का बुधवार देर रात महाराष्ट्र के पुणे स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे। उनके पुत्र सिद्धार्थ गाडगिल ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में इसकी पुष्टि की। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार शाम 4 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट पर किया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई प्रमुख लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गडकरी ने कहा कि गाडगिल ने अपना पूरा जीवन पर्यावरणीय चेतना को जीवंत बनाए रखने और पश्चिमी घाट की जैव विविधता के संरक्षण के लिए समर्पित किया। गाडगिल का योगदान केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। उन्होंने जिस तरह से पर्यावरण और जैव विविधता के मुद्दों को जन चेतना से जोड़ा, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि गाडगिल के निधन से भारत ने पारिस्थितिकी अनुसंधान की एक प्रमुख आवाज खो दी है। गाडगिल ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को संरक्षणात्मक कार्रवाई में बदलने में अहम भूमिका निभाई। पद्मभूषण, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और कर्नाटक के राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित गाडगिल ने शोध, शिक्षण और संरक्षण में अमिट छाप छोड़ी। उनका जीवनकार्य हमें यह सिखाता है कि विज्ञान और समाज के बीच सेतु बनाकर ही स्थायी विकास संभव है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गाडगिल भारत में पर्यावरण जनजागृती और संरक्षण के अग्रणी नाम थे। पश्चिमी घाट के संरक्षण में उनका काम उल्लेखनीय रहा। भारत के जैव विविधता कानून के शिल्पकार के रूप में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने केवल लेखन और प्रबोधन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय समुदायों को जोड़कर प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग का मार्ग दिखाया।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि गाडगिल प्रकृति और सामाजिक न्याय की करुणामयी आवाज थे। उनका जीवनकार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने हमें यह सिखाया कि पर्यावरण संरक्षण केवल वैज्ञानिकों का विषय नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पश्चिमी घाट के संरक्षण में गाडगिल का योगदान सदैव याद किया जाएगा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उन्हें शीर्ष वैज्ञानिक, संस्थान निर्माता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का समर्थक बताया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि गाडगिल भारतीय पारिस्थितिकी के महानायक थे। उनकी रिपोर्ट ने केरल में जैव विविधता संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन पर गहन बहस को जन्म दिया। उनकी दूरदर्शिता और विवेक आज भी हमें मार्गदर्शन देते हैं।
बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि गाडगिल ने भारत में पर्यावरणवाद की नींव रखी। पश्चिमी घाट की जैव विविधता के संरक्षण में उनका योगदान अमूल्य है। उनके निधन से पर्यावरण और जैवविविधता के क्षेत्र में दिशा दिखाने वाला एक जानकार व्यक्तित्व खो गया है।
इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि गाडगिल एक आदर्श वैज्ञानिक और नागरिक थे। वह मेरे मित्र और मार्गदर्शक रहे। उनका व्यक्तित्व ज्ञान, विनम्रता और सहृदयता का अद्वितीय संगम था। वे केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सजग नागरिक भी थे। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर