आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा- काटने के साथ सड़कों पर हादसे का भी डर
नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि अब एक ही काम बाकी रह गया है कि आवारा कुत्तों की काउंसलिंग की जाए। दरअसल, सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कोई कुत्ता बेकाबू है तो एक से
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि अब एक ही काम बाकी रह गया है कि आवारा कुत्तों की काउंसलिंग की जाए। दरअसल, सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कोई कुत्ता बेकाबू है तो एक सेंटर को फोन किया जाता है, जहां उसे पकड़ा जाता है, उसकी नसबंदी की जाती है और फिर उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अब यही बाकी है कि कुत्तों की भी काउंसलिंग दी जाए कि वो किसी को काटें नहीं। कहा कि कुत्तों से खतरा सिर्फ काटे जाने से नहीं है, अगर वो सड़क पर हैं और किसी के पीछे भागते हैं तो हादसा भी हो सकता है। प्रशासन कोर्ट के आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहा है।

सुनवाई के दौरान बुधवार काे डॉग लवर की ओर से बोलने के लिए जब कपिल सिब्बल खड़े हुए तो कोर्ट ने उनसे पूछा कि चिकन, गोट्स को लेकर आपका क्या ख्याल है। तब सिब्बल ने कहा कि मैने चिकन खाना छोड़ दिया है। सिब्बल ने कहा कि अगर एक टाइगर किसी आदमी पर हमला करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि सभी टाइगर को पिंजरे में बंद कर दिया जाए। बधियाकरण ही वो तरीका है जिनसे आवारा कुत्तों की संख्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। अगर रेबीज इंफेक्शन के शिकार कुतों को ऐसे कुत्तों के साथ शेल्टर होम में रखा जाएगा जिन्हें यह इंफेक्शन नहीं है तो सभी कुत्तों को रेबीज हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर हम कुत्तों से प्यार से पेश आते हैं तो वो हमें नहीं काटेंगे। हमें कुतों के साथ रहना सीखना होगा। अगर हम उनके स्पेस में दखल देंगे तो वो काटेंगे। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आप खुशकिस्मत हैं जो बचे हुए हैं। वर्ना कुत्ते बहुत से लोगों को काट रहे है, बच्चों को काट रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों से खतरा सिर्फ काटे जाने से नहीं है। अगर वो सड़क पर हैं और किसी के पीछे भागते हैं तो हादसा भी हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन कोर्ट के आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहा है।

कोर्ट ने कहा कि पिछले 20 दिनों में जानवरों से जुड़े दो सड़क हादसे हुए। एक में तो एक जज की स्थिति गंभीर है और उनकी रीढ़ में जख्म है। आज सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए एक स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर तैयार किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के 1400 किलोमीटर का हिस्सा संवेदनशील है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कहता है कि इस हिस्से की देखभाल राज्य सरकार करे। तब कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को उस इलाके में बाड़ लगाना चाहिए।

22 अगस्त, 2025 को उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने आवारा कुत्तों के मामले पर दो जजों की बेंच के आदेश में बदलाव करते हुए कहा था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम से तभी छोड़ा जाएगा जब उन्हें टीका (इम्युनाइजेशन) लग जाएगा और बधियाकरण हो जाएगा। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि शेल्टर होम से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर लगी रोक को इस बदलाव के साथ हटाया जा रहा है।

इसके पहले 11 अगस्त, 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों और गलियों को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने के लिए उच्चतम न्यायालय ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद समेत एनसीआर में संबंधित प्राधिकार को निर्देश दिया था कि वो शहर को, गलियों को आवारा कुत्तों से मुक्त करें। जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने कहा था कि सभी स्थानों से आवारा कुत्तों को उठाया जाए। इन आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में रखा जाए।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी