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छपरा, 05 जनवरी (हि.स.)। छपरा का दहियावा टोला शहर का वो इलाका जिसे पॉश कहा जाता है जहाँ तथा कथित राजनीति के कद्दावर लोग और बड़े अधिकारी रहते हैं। लेकिन आज यह इलाका अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सालों से जलजमाव और प्रशासनिक उदासीनता ने यहां के नरक जैसे हालात बना दिए हैं।
तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। ये छपरा का वही दहियावा टोला कामता सखी मठ मार्ग है, जिसे शहर के पॉश इलाकों में गिना जाता है। लेकिन आज यहाँ का नजारा किसी नरक से कम नहीं है। पिछले कई सालों से यहाँ की सड़कों पर नालियों का गंदा पानी जमा है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, यह सड़क सिस्टम की संवेदनहीनता और राजनीतिक उदासीनता की जीती-जागती उदाहरण बन गई है।
हैरानी की बात यह है कि इस मोहल्ले में रहने वाले अधिकांश लोग उच्च सरकारी पदों पर तैनात हैं। स्थानीय निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा रोग और संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। डेंगू और मलेरिया का खतरा हर वक्त सिर पर मंडराता रहता है, लेकिन प्रशासन है कि कुंभकर्णी नींद से जागने का नाम नहीं ले रहा।
जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं। आलम यह है कि बच्चों का स्कूल जाना और बीमारों का अस्पताल पहुंचना दूभर हो गया है। चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि अब इस समस्या पर मौन साधे हुए हैं। कई बार लिखित आवेदन दिए गए, गुहार लगाई गई, लेकिन नतीजा जश का तस बना है।
सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं हर कदम पर दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। आखिर कब तक दहियावा टोला के इन लोगों को इस गंदगी और नरक से मुक्ति मिलेगी अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद क्या प्रशासन की नींद टूटती है या यहाँ के लोग ऐसे ही बदहाली में जीने को मजबूर रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार