अवैध रूप से जारी होने के कारण राज्य सरकार के डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को नजरअंदाज कर रहा है चुनाव आयोग: शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, 05 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता अधिकार स्थापित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को भारतीय
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कोलकाता, 05 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता अधिकार स्थापित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को भारतीय चुनाव आयोग द्वारा वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार न किया जाना पूरी तरह उचित और न्यायसंगत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये प्रमाणपत्र अवैध तरीके से जारी किए गए हैं।

रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि 16 दिसंबर को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा जारी डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए।

सोमवार को शुभेंदु अधिकारी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र भेजकर विस्तार से यह तर्क रखा कि ऐसे डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को वैध पहचान दस्तावेज क्यों नहीं माना जाना चाहिए। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इन प्रमाणपत्रों को स्वीकार न कर सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस विषय से जुड़े कानूनी प्रावधानों का ठीक से अध्ययन करना चाहिए। किसी व्यक्ति को यदि किसी स्थान पर 10 वर्षों से कम समय से निवास है तो उसे डोमिसाइल प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक सुनियोजित रणनीति के तहत अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट को केवल डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी कराने के उद्देश्य से अचानक कोलकाता नगर निगम का आयुक्त बना दिया जाए, तो ऐसे प्रमाणपत्रों को स्वीकार न किया जाना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की प्रणाली अत्याधुनिक और मजबूत है।

इससे पहले दिन में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र को राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने का प्रयास है, जो मतदाता सूची में वर्षों से पनप रही खामियों को उजागर कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने पिछले एक दशक में इन खामियों का चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया है।

रविवार को शुभेंदु अधिकारी ने यह सवाल भी उठाया था कि मुख्यमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी राजनीतिक आपत्तियों को उठाने के लिए मुख्यमंत्री के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल कैसे किया। उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में उन्हें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के रूप में अपने पार्टी लेटरहेड का उपयोग करना चाहिए था।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर