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अजमेर, 5 जनवरी (हि.स.)। अजमेर पंचायत समिति (ग्रामीण) में आगामी चुनावों के मद्देनजर किए गए नए परिसीमन को लेकर कांग्रेस देहात अध्यक्ष एवं किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी ने अजमेर अदालत में आपत्ति याचिका दायर की है। याचिका में परिसीमन को असंतुलित, भेदभावपूर्ण और राजनीतिक दबाव में किया गया बताते हुए इसे निरस्त कर नए सिरे से परिसीमन प्रारूप जारी करने की मांग की गई है।
विकास चौधरी की ओर से एडवोकेट विवेक पाराशर, हरिसिंह गुर्जर, राजेश ईनाणी, मंजूर अली, बृजेश पांडे और अशरफ बुलंद खान द्वारा प्रस्तुत याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने सत्ता के दबाव में एक सोची-समझी रणनीति के तहत “वोटों का बंदरबांट” किया है। याचिका के अनुसार परिसीमन में नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ चुनिंदा ग्राम पंचायतों को जोड़कर एक ही वार्ड में 20 हजार से अधिक मतदाता कर दिए गए हैं, जबकि अन्य वार्डों में मतदाताओं की संख्या काफी कम रखी गई है।याचिका में कहा गया है कि एक वार्ड में 20 हजार से अधिक मतदाता और अन्य वार्डों का अत्यधिक छोटा होना न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि चुनाव आयोग के समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का भी उल्लंघन है। इसे एक विशेष विचारधारा के वोट बैंक को एकत्र या विभाजित कर चुनाव परिणाम प्रभावित करने की राजनीतिक साजिश बताया गया है।कांग्रेस नेता ने पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि इसके अनुसार प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या यथासंभव समान होनी चाहिए, जबकि अजमेर ग्रामीण पंचायत समिति के वार्ड संख्या 1 में जहां 2442 की आबादी है, वहीं वार्ड संख्या 15 में 20,527 की आबादी है। इसी तरह जिला परिषद के वार्ड संख्या 32 में चार ग्राम पंचायतों के साथ 21,170 की आबादी है, जबकि वार्ड संख्या 18 में 12 ग्राम पंचायतों को मिलाकर 48,167 की आबादी वाला क्षेत्र बनाया गया है।याचिका में परिसीमन और पुनर्गठन से जुड़ी 27 प्रमुख विसंगतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इससे कई पंचायत समितियों और जिला परिषद क्षेत्रों में असंतुलित जनसंख्या, अव्यवहारिक दूरी और ग्रामों को कृत्रिम रूप से तोड़ने-जोड़ने जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। इससे आम नागरिकों को अपने जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने में कठिनाई होगी और पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना को ठेस पहुंचेगी।गौरतलब है कि एक दिन पहले ही विकास चौधरी ने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा सरकार पर लोकतंत्र और जनहित से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर परिसीमन और पुनर्गठन किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष