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जयपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। राज्य सरकार के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग राजस्थान की ओर से 31 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग शुचि त्यागी तथा आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देशन में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, जयपुर द्वितीय (विद्याधर नगर परिसर) में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जिला परिवहन अधिकारी अतुल कुमार शर्मा ने बताया कि सड़क सुरक्षा माह का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना तथा सुरक्षित एवं अनुशासित ड्राइविंग व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जन-धन की हानि को रोकने के लिए विभाग निरंतर जागरूकता, प्रशिक्षण एवं प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान सड़क सुरक्षा नियमों, हेलमेट व सीट बेल्ट के महत्व, गति नियंत्रण, लेन अनुशासन, मोबाइल का उपयोग न करने, नशे में वाहन न चलाने, ओवरलोडिंग से बचाव तथा वाहन फिटनेस एवं मेंटेनेंस जैसे विषयों पर जागरूकता व्याख्यान दिया गया। यह व्याख्यान निरीक्षक दिनेश सिंह, राजेश चौधरी एवं जिला परिवहन अधिकारी अतुल कुमार शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जयपुर द्वितीय धर्मेन्द्र कुमार के नेतृत्व में उपस्थित प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा शपथ दिलाई गई। साथ ही शंकरा आई हॉस्पिटल, विद्याधर नगर की ओर से वाहन चालकों के लिए नेत्र जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के सहयोग से राजकुमार राजपाल एवं राधेलाल शर्मा के मार्गदर्शन में बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान त्वरित प्राथमिक उपचार प्रदान कर जीवन रक्षा करना रहा।
कार्यक्रम में ऑटो रिक्शा एवं ई-रिक्शा चालक मुख्य रूप से शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालक प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़े रहते हैं, इसलिए सड़क सुरक्षा में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जिला परिवहन अधिकारी अतुल कुमार शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल विभाग की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। नेत्र जांच जैसे शिविर चालकों की दृष्टि क्षमता सुनिश्चित करते हैं, जिससे दुर्घटना का जोखिम कम होता है। वहीं बीएलएस प्रशिक्षण आपात स्थिति में त्वरित उपचार की क्षमता विकसित करता है, जिससे गंभीर चोट और मृत्यु की संभावना घटती है।
उन्होंने बताया कि परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग का लक्ष्य सुरक्षित यातायात प्रणाली विकसित करना है, जिसके तहत वाहन फिटनेस मानकों का अनुपालन, यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी प्रवर्तन, चालकों के स्वास्थ्य व दक्षता से जुड़े कार्यक्रम तथा दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता के लिए प्रशिक्षण और समन्वय जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश