एमडीएम अस्पताल में राजस्थान की पहली ऐओर्टिक आर्च एन्यूरिज्म की सफल सर्जरी
जोधपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन माथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में राजस्थान की पहली ऐओर्टिक आर्च एन्यूरिज्म की सफल डीब्रांचिंग के साथ इंडोवैस्कुलर टीवार तकनीक की आधुनिक सर्जरी की गई है। सीटीवीएस विभाग के व
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जोधपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन माथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में राजस्थान की पहली ऐओर्टिक आर्च एन्यूरिज्म की सफल डीब्रांचिंग के साथ इंडोवैस्कुलर टीवार तकनीक की आधुनिक सर्जरी की गई है।

सीटीवीएस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि 61 वर्षीय अब्दुल सलीम तथा 65 वर्षीय धान सिंह शरीर की महाधमनी अयोर्रटा के आर्च एन्यूरिज्म से पीडि़त थे। यह दोनों पेशेंट इस महाविद्यालय के सिटीवीएस विभाग में जयपुर से रेफर हुए। पूरे राजस्थान के गवर्नमेंट सेक्टर में यह सुविधा एमडीएम अस्पताल में ही मौजूद है और संभवत: डीब्रांचिंग के साथ इंडो वैस्कुलर टीवार टेक्नोलॉजी राजस्थान की प्रथम सर्जरी है।

दोनों मरीज गत छह महीनों से छाती में दर्द, सांस फूलना तथा अधिक रक्तचाप से पीडि़त थे इनकी जांचे सिटी एंजियोग्राफी, एमआरआई, इकोकार्डियोग्राफी में शरीर की महाधमनी अयोर्रटा के थोरेसिक आर्च में एन्यूरिज्म होने की पुष्टि हुई। मरिज तथा उनके परिजनों से सहमति के उपरांत इन दोनों मरीजों की सफल सर्जरी की गई। इस सर्जरी में मरीज की बिना छाती खोलें गर्दन में छोटे चीरे तथा जांघ में नीडल पंचर होल के जरिए इंडो वैस्कुलर तकनीक टीवार के माध्यम से संपन्न की गई।

सीटीवीएस विभाग के डॉ. सुभाष बलारा, डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. देवाराम, डॉ. अमित निश्चेतन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. राकेश करनावत, सहायक अचार्य डॉ. भरत चौधरी, डॉ. कीर्ति, डॉ. रितु परफ्यूशनिस्ट माधो सिंह और मनोज कैथलैब टेक्नीशियन धर्मेंद्र मरेठा व प्रेम ओटी स्टाफ दिलीप, मोनिका रितु, नीलम, शक्ति बिलाल, सीटी आईसीयू के डॉ. धर्मेंद्र डॉ. प्रशांत और डॉ. प्रदुम्न सी.टी आईसीयू स्टाफ राजेन्द्र, राहुल, भंवर ने इलाज में अहम भूमिका निभाई। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर डॉ. बीएस जोधा तथा एमडीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने सीटीवीएस टीम को बधाई दी।

सीटीवीएस विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिनव सिंह ने बताया कि ऑयोर्टिक आर्च एन्यूरिज्म एक दुर्लभ एवं जटिल बीमारी है जिसका इनसीडेनंस नॉर्मल पापुलेशन में 10 प्रति लाख होता है। यह बीमारी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में दो से चार गुना ज्यादा होती है और इनके मैरिज 60 से 70 दशक की उम्र वाले होते हैं। बीमारी के मुख्य कारण शरीर की महाधमनी अयोर्रटा में एथेरोईसकेरोसिस( चर्बी जमना), हाई ब्लड प्रेशर, अधिक शुगर, धूम्रपान की लत, कनेक्टिव टिशु डिसऑर्ड, छाती में गंभीर चोट या फिर कुछ विशेष प्रकार की वायरल डिजीज एवं वैस्कुलाइटिस होता है। इस बीमारी के मुख्य सिंपटम छाती के साथ जबड़े या कमर मे दर्द होना, आकार में अधिक बड़े हो जाने के उपरांत सांस फूलना या आहार नाल का दबना होता है। समय रहते इलाज ना होने से अनूरिज्म रप्चर या महादानी का डिसेक्शन इस बिमारी का एक खतरनाक प्रारूप है जो की जानलेवा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश