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बेंगलुरु, 29 जनवरी (हि.स.)। विज्ञान, नवाचार और दर्शन के समन्वय वाले चार दिवसीय कार्यक्रम ‘दक्षिणास्य दर्शिनी– विज्ञान के माध्यम से चेतना’ का शुभारंभ गुरुवार को बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में हुआ। यह कार्यक्रम 1 फरवरी तक चलेगा। यह आयोजन परम फाउंडेशन, वेदांत भारती एवं मिथिक सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।
समारोह के उद्घाटन अवसर पर परमपूज्य श्री श्री शंकर भारती महास्वामी, परमपूज्य श्री श्री ब्रह्मानंद भारती स्वामीजी, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, इतिहासकार एवं स्तंभकार विक्रम संपत, परम फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास गुप्ता तथा वेदांत भारती के ट्रस्टी लक्ष्मीश सिंह उपस्थित रहे।
उद्घाटन भाषण में एस. सोमनाथ ने युवाओं में जिज्ञासा, वैज्ञानिक खोज और मौलिक सोच को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथियों एस. सोमनाथ और विक्रम संपत ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छात्रों से संवाद किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्र मेकथॉन रहा, जिसमें 80 से अधिक स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें से चयनित 43 अंतिम टीमों ने अपने नवाचारी प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया। इन परियोजनाओं में वेदांत चिंतन और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचार का अनूठा समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम में 22 स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग 2,400 छात्र भाग ले रहे हैं। मेकथॉन के विजेताओं की घोषणा कार्यक्रम के दौरान की जाएगी। सभ्यता और चेतना आधारित दृष्टिकोण से विज्ञान शिक्षा को पुनः परिकल्पित करने के उद्देश्य से ‘दक्षिणास्य दर्शिनी’ आगामी दिनों में विभिन्न प्रदर्शनों, संवादों और चर्चाओं के साथ जारी रहेगी।
इस अवसर पर परम फाउंडेशन और वेदांत भारती के बीच विज्ञान, नवाचार और दर्शन के संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा