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राजसमंद, 2 दिसंबर (हि.स.)। तीन दिवसीय कुंभलगढ़ फेस्टिवल का दूसरा दिन भी उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। सूर्योदय से लेकर देर शाम तक आयोजित कार्यक्रमों में देशी–विदेशी पर्यटकों की उल्लेखनीय भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा दुर्ग परिसर जीवंत माहौल से भर उठा।
दिनभर मंच पर चकरी, सहरिया, चंग-ढप, कच्छी घोड़ी, लाल अंगी, बांकिया, बहरूपिया, कालबेलिया, लंगा और गवरी जैसी पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों की अद्भुत प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। लोक कलाकारों की सजीव प्रस्तुति पर पर्यटकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और कई अवसरों पर वे लोक धुनों पर थिरकते भी नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों और पर्यटकों की सामूहिक सहभागिता ने पूरे वातावरण में उल्लास का अनोखा दृश्य प्रस्तुत किया।
शाम लोकराग–संदीप रत्नू द्वारा प्रस्तुत लोक संगीत का नाट्य कार्यक्रम दिन का मुख्य आकर्षण रहा। प्रभावशाली मंचन और मधुर लोक धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसके बाद परिसर तालियों की गूंज से गुंजायमान हो उठा। पगड़ी बांधो प्रतियोगिता में भी पर्यटकों ने विशेष रुचि दिखाई और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने गतिविधि में भाग लिया।
दूसरे दिन कुंभलगढ़ दुर्ग में आगंतुकों की लगातार आवाजाही रही। प्राचीन वास्तुकला, प्राकृतिक सौंदर्य और राजस्थानी संस्कृति की मिश्रित अनुभूति ने आगंतुकों को पूरा दिन व्यस्त रखा। परिवारों, युवा समूहों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सक्रिय भागीदारी से फेस्टिवल परिसर में लगातार रौनक बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस द्वारा सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुमिता सरोच, उप निदेशक शिखा सक्सेना, एसडीएम साक्षी पूरी, सहायक निदेशक विवेक जोशी, सहायक निदेशक जितेंद्र माली, पर्यटक अधिकारी नीलू राठौड़, होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी और बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए पर्यटक उपस्थित रहे।
फेस्टिवल के तीसरे दिन 3 दिसंबर को शाम नगाड़ा कॉन्सर्ट–डांसिंग पीकॉक द्वारा ड्रम ओडिसी का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही दिनभर राजस्थानी लोक नृत्य-संगीत, पगड़ी पहनाओ प्रतियोगिता, टग ऑफ वॉर और अनेक आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Giriraj Soni