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बागपत, 2 दिसंबर (हि.स.)। बागपत जिला कलेक्ट्रेट इन दिनों पक्षियों और जानवरों का आशियाना बन गया। कलेक्ट्रेट पर आने वाले फरियादियो के लिए लकड़ी के बेंच बनाये गए तो पक्षियों के लिए पक्षी टावर बना दिया गया। इतना ही नही कलेक्ट्रेट पर सर्दी से कुत्तों को बचाने के लिए वेस्ट मेटियरल का उपयोग कर उनका आशियाना बनाया गया है जिसमें गद्दे भी मौजूद है और तकिया भी। बागपत जिलाधिकारी की यह पहल जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पशु पक्षियों को दाना देना उनको पेट भर खाना खिलाना भारतीय सनातन संस्कृति की परंपरा रही है।आदिकाल से ही यह परंपरा हमारे पूर्वज निभाते आये है। भारतीय संस्कृति ने हमेशा उनकी पूजा की है जिन्होंने इंसान को कुछ ना कुछ दिया है। इस प्रकृति में सूर्य, हवा, पानी, मिट्टी और धरती पर मौजूद पेड़ -पौधे सभी को हमारे पूर्वजो ने ऊंचा स्थान दिया है। उनका मानना रहा है कि इन सभी की वंदना करने से, पशु पक्षियों की सेवा करने से भगवान प्रसन्न होते है और उसका फल इंसान को ही मिलता है। ऐसी ही परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है बागपत की आईएएस अधिकारी अस्मिता लाल ने .....
कुत्तों के लिए लगे गद्दे और तकिये
जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर कलेक्ट्रेट भवन में एक दर्जन से अधिक कुत्तों के लिए छोटे आशियाने लगे है। जिनको स्पर्श पशु रैन बसेरा नाम दिया गया है। इन स्पर्श पशु रैन बसेरे में गद्दे लगाए गए हैं और तकिये भी मौजूद हैं इतना ही नहीं उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी जिलाधिकारी द्वारा की गई है।
वेस्ट वंडर प्लान किया तैयार
जिलाधिकारी अस्मिता लाल का कहना है वेस्ट वंडर कॉन्सेप्ट के आधार पर बागपत जनपद के सभी नगर निकायों, नगर पंचायत और अन्य स्थानों पर छोटे पशुओं के लिए इस तरह के आशियाने का निर्माण किया गया है। नगर पालिकाओं, नगर पंचायत से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल, ड्रम और टायरों से यह आशियाने तैयार किए गए हैं। जिसमें गद्दे और अन्य सामान का प्रयोग किया गया है। सर्दी को देखते हुए यह प्लान कारगर साबित हो रहा है इन आसियानों में छोटे पशु बैठने भी लगे हैं।
पक्षी टावर का भी हुआ निर्माण
आईएएस अस्मिता लाल ने बागपत कलेक्ट्रेट के अंदर पक्षी टावर का भी निर्माण कराया है जिसमें 40 से अधिक छोटे घर बने हैं। पक्षी उनमें अपना घोंसला बना रहे हैं पूरे दिन होने वाली चिड़ियों की चहचाहट बताती है कि जिलाधिकारी की यह पहला पक्षियों के लिए एक वरदान साबित हुई है और पक्षी अपना घर पाकर खुश है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन त्यागी