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दंतेवाड़ा, 19 जुलाई (हि.स.)। पर्यावरण संरक्षण और जिले में हरित आवरण को तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा कृषि विभाग ने एक सराहनीय पहल करते हुए जिला प्रशासन के साथ मिलकर विभाग ने एक ही दिन में एक लाख 'बीज गोले' (सीड बॉल) तैयार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
यह अभियान न केवल पर्यावरण के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। कृषि विभाग द्वारा अपनाई गई यह पद्धति जापानी तकनीक पर आधारित है। बीज गोले लड्डू के आकार के बनाए जा रहे हैं, जिनमें मिट्टी, जैविक खाद और स्थानीय जलवायु के अनुकूल वृक्षों जैसे इमली, जामुन, टोरा, सीताफल और करंज के बीज शामिल किए गए हैं।
दंतेवाड़ा के उप संचालक कृषि सूरज पंसारे के अनुसार, इस तकनीक में बीज मिट्टी और खाद की परत के भीतर सुरक्षित रहता है, जिससे उसे पक्षियों और अन्य जीवों से कोई नुकसान नहीं पहुंचता। साथ ही, यह मिट्टी में नमी बनाए रखता है, जिससे बीजों के अंकुरण की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस पूरे अभियान में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, 46 बीआरसी समूह और 14 एपीओ संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ रही है। जिला प्रशासन द्वारा बीज गोला तैयार करने वाली महिलाओं को प्रति गोला चार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा। महिलाएं न केवल पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे रही हैं, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
तैयार किए गए इन बीज गोलों (सीड बॉल)को दो दिनों तक सुखाया जाएगा और फिर वर्षा ऋतु में जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों व अनुपयोगी भूमि पर बिखेरा जाएगा। कृषि विभाग का लक्ष्य इस अभियान को केवल एक वर्ष तक सीमित न रखकर भविष्य में भी जारी रखना है। जनभागीदारी और सामुदायिक सहयोग से संचालित यह पहल दंतेवाड़ा को हरित विकास की नई मिसाल बनाने की ओर अग्रसर है। आने वाले वर्षों में हजारों नए पौधों का प्राकृतिक अंकुरण जिले की जैव विविधता को और मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे