आरएसएस की युवा संगोष्ठी में युवाओं से 'पंच परिवर्तन' अपनाने का आह्वान
धनबाद, 19 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को धनबाद में युवा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आईआईटी आईएसएम के जीजेएलटी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े
संगोष्ठी के दौरान मंचासीन अतिथिगण


धनबाद, 19 जुलाई (हि.स.)।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को धनबाद में युवा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आईआईटी आईएसएम के जीजेएलटी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े 20 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 223 युवाओं ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और संघ के 'पंच परिवर्तन' अभियान को लेकर युवाओं के साथ संवाद किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आईआईटी आईएसएम के प्रोफेसर धीरज कुमार ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए युवाओं की सकारात्मक भागीदारी पर जोर दिया। इसके बाद युवाओं ने राष्ट्र निर्माण और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर पदाधिकारियों से सीधे बातचीत कर अपने सवाल रखे।

मुख्य वक्ता और क्षेत्र सामाजिक सद्भाव संयोजक राकेश लाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है और इस शताब्दी वर्ष में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, सामाजिक समरसता, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य जैसे पांच प्रमुख विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ संस्कार और देशभक्ति भी उतनी ही जरूरी है, तभी आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा।

संगोष्ठी में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, अनुशासन, समय प्रबंधन और स्वरोजगार जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। युवाओं से अपने घर और मुहल्ले से सामाजिक बदलाव, स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवन की शुरुआत करने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि युवा ही राष्ट्र की रीढ़ हैं और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित युवाओं का निर्माण करना है। ताकि विकसित भारत की परिकल्पना पूरी हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार झा