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खूंटी , 19 जुलाई (हि.स.)। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) रसिकेश कुमार के मार्गदर्शन में रविवार को खूंटी उप-कारागार में विशेष जेल अदालत, विधिक जागरूकता शिविर तथा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विचाराधीन बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना, निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना था।
शिविर में उप-कारागार के 98 पुरुष एवं 11 महिला विचाराधीन बंदियों ने भाग लिया। न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों को जेल अदालत की उपयोगिता, न्यायिक प्रक्रिया तथा निःशुल्क विधिक सहायता के अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत संचालित विधिक सहायता प्रतिरक्षा परामर्शी (एलएडीसी) प्रणाली के माध्यम से पात्र बंदियों को बिना किसी शुल्क के कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अर्जुन साव, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी विद्यावती कुमारी तथा डीएलएसए के सचिव कमलेश बेहरा ने बंदियों की समस्याएं सुनीं और उनके लंबित मामलों से जुड़े प्रश्नों का समाधान किया। जेल अदालत के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में एक अभियुक्त के मामले का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जिससे संबंधित बंदी को तत्काल राहत मिली।
इस अवसर पर बंदियों को कारागार परिसर में संचालित जेल विधिक सहायता क्लिनिक एवं मुलाकात विधिक सहायता हेल्प डेस्क की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन सेवाओं के माध्यम से बंदी और उनके परिजन विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं एवं विधिक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
सदर अस्पताल के सहयोग से आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रेणु कुमारी, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजय कुजूर, दंत चिकित्सक तथा नर्सिंग स्टाफ ने बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। आवश्यकतानुसार दवाइयों का वितरण किया गया और चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया।
डीएलएसए सचिव सह सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कमलेश बेहरा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को न्याय तक सरल पहुंच, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता तथा बेहतर स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा