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धमतरी में खेती ने पकड़ी रफ्तार, किसानों ने समय पर खाद-बीज और राहत की उठाई मांग
धमतरी, 19 जुलाई (हि.स.)। दो दिनों तक लगातार हुई रिमझिम बारिश के बाद रविवार को मौसम साफ होते ही जिलेभर में खेती-किसानी की गतिविधियां तेज हो गईं। बारिश से खेतों में पर्याप्त पानी भरने के बाद अब जल निकासी शुरू हो गई है, जिससे किसानों ने बुआई, जुताई, रोपाई और मटाई का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
धमतरी, नगरी और कुरूद विकासखंड सहित जिले के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में खेतों में किसानों की चहल-पहल बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि इस समय हुई बारिश खेतों के लिए अमृत के समान है और यदि आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद है। हालांकि मौसम विभाग की ओर से आगामी दिनों में फिर बारिश की संभावना जताए जाने से किसान मौसम की चाल पर भी नजर बनाए हुए हैं। बारिश के अभाव में अब तक बुआई और रोपाई में पीछे चल रहे किसान भी तेजी से खेतों में उतर गए हैं। जिले में अब तक धमतरी तहसील में 288 मिमी, कुरूद में 272 मिमी, मगरलोड में 321 मिमी, नगरी में 291 मिमी, भखारा में 194 मिमी, कुकरेल में 288 मिमी तथा बेलरगांव में 294 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
जिले में सबसे अधिक वर्षा मगरलोड तहसील में और सबसे कम भखारा तहसील में हुई है। इस बीच किसानों ने खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं को भी सामने रखा। कुरूद विकासखंड के ग्राम रामपुर के किसान पंचराम साहू ने कहा कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि खेती का कार्य बिना बाधा के पूरा हो सके। किसान दिनेश कुमार साहू ने कृषि को मनरेगा योजना से जोड़ने की मांग करते हुए कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त राहत मिलेगी और खेती की बढ़ती लागत का बोझ कुछ कम होगा। उन्होंने बताया कि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण ट्रैक्टर से खेतों की जुताई महंगी होती जा रही है। वहीं ग्राम डाही के किसान मनोज साहू और बीरबल साहू ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए सरकार को किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए व्यापक और प्रभावी नीति बनानी चाहिए, जिससे कृषि लाभकारी बन सके और किसानों को आर्थिक संबल मिल सके।
जिले में 69.83 प्रतिशत रोपाई व बोआई
उपसंचालक कृषि मोनेश कुमार साहू ने बताया कि जिले में इस साल एक लाख 38 हजार हेक्टेयर पर खेती किसानी का लक्ष्य रखा है। कुल 96900 हेक्टेयर पर रोपा, बोता व लेही हो चुका है। 80.300 हेक्टेयर पर बोता हो चुका है, जो लक्ष्य का 97.46 प्रतिशत है और रोपा सिर्फ 16600. हेक्टेयर पर हुआ है जबकि रोपा का लक्ष्य जिले में 56370 हेक्टेयर रखा गया है। बोता फसल को अब बारिश के माध्यम से सिंचाई पानी की सख्त जरूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा