सीएमडीसी-जेएनएआरडीडीसी का ऐतिहासिक समझौता, छत्तीसगढ़ बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान का नया केंद्र
रायपुर 19 जुलाई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ''क्रिटिकल मिनरल मिशन'' और ''आत्मनिर्भर भारत'' के संकल्प को नई मजबूती देते हुए छत्तीसगढ़ ने खनिज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिट
सीएमडीसी और जेएनएआरडीडीसी के बीच  समझौता


रायपुर 19 जुलाई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'क्रिटिकल मिनरल मिशन' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई मजबूती देते हुए छत्तीसगढ़ ने खनिज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के बीच शनिवार देर शाम को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) से राज्य में क्रिटिकल मिनरल्स के वैज्ञानिक अनुसंधान, मूल्य संवर्धन और आधुनिक खनन तकनीकों को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संपन्न इस समझौते को प्रदेश की खनिज संपदा के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थाएं खनिज संसाधनों के अनुसंधान, उन्नत तकनीक के विकास, मूल्य संवर्धन और क्रिटिकल मिनरल्स की खोज एवं उपयोग के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगी। इससे राज्य की खनिज क्षमता का बेहतर दोहन होने के साथ औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

एमओयू आदान-प्रदान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल तथा जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ ने कहा कि अनुसंधान आधारित खनिज विकास, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सहयोग ही भविष्य के खनन क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी प्रदेश और देश के खनिज क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाएगी।

भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी और खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं की साझेदारी से छत्तीसगढ़ में खनिज विकास को नई गति मिली है।

इस अवसर पर सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं और भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध खनिज संपदा के वैज्ञानिक एवं समावेशी उपयोग के लिए निगम लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए कार्य कर रहा है।

रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं ने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ पारदर्शी एवं वैधानिक खनन व्यवस्था को भी मजबूत किया है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की रिकवरी पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुसंधान भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान पंकज कुलश्रेष्ठ और सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया। स्वागत उद्बोधन में संजय कनकने ने इस समझौते को खनिज अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी खनिज अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी और जेएनएआरडीडीसी का यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा सतत खनन को नई दिशा देगा। साथ ही यह पहल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देने के साथ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन के नए अध्याय भी लिखेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल