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700 वर्ष प्राचीन भुइयाँरानी मंदिर में श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, पवित्र रज के लेपन की है विशेष मान्यता
हमीरपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले हमीरपुर जिले के कुरारा विकास खंड क्षेत्र के झलोखर गांव स्थित लगभग 700 वर्ष प्राचीन भुइयाँरानी माँ भुवनेश्वरी मंदिर में आषाढ़ माह के तृतीय रविवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में आयोजित विशाल धार्मिक मेले में जनपद सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और माँ भुवनेश्वरी के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
आषाढ़ माह में लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। शनिवार से ही श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने मंदिर में आयोजित विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया तथा रात्रि विश्राम के बाद रविवार प्रातः विधि-विधान से माँ की पूजा-अर्चना की। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं ने उपलों एवं कंडों की अग्नि में भौरियां बनाकर माँ को अर्पित कीं और प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर की एक विशेष धार्मिक मान्यता भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर की पवित्र रज (मिट्टी) का शरीर पर लेपन करने से गठिया, वात एवं अन्य जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। इसी विश्वास के कारण प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचकर पवित्र रज का लेपन करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि माँ भुवनेश्वरी धाम का इतिहास लगभग 700 वर्ष पुराना है। प्राचीन ब्रिटिश गजेटियर में भी भुइयाँरानी मंदिर एवं यहाँ लगने वाले मेले का उल्लेख मिलता है, जो इस धार्मिक स्थल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्ता को प्रमाणित करता है।
मेले में महिलाओं एवं बच्चों ने जमकर खरीदारी की। झूलों पर बच्चों की खूब भीड़ रही, जबकि विभिन्न दुकानों पर पूरे दिन चहल-पहल बनी रही। मेले की व्यवस्थाओं में ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना पुलिस भी पूरे समय मेला परिसर में तैनात रही।
पूरे दिन मंदिर परिसर जय माँ भुवनेश्वरी के जयघोष से गूंजता रहा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर ग्रामवासियों ने मंदिर के समीप स्थित प्रेमसागर तालाब के सुंदरीकरण की मांग जिलाधिकारी से करते हुए कहा कि यदि तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जाए तो धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से यह स्थल और अधिक आकर्षक बन सकता है।
मंदिर के प्रबंधक निर्भयदास प्रजापति ने बताया कि आषाढ़ माह का अंतिम एवं चौथा विशाल धार्मिक मेला आगामी 26 जुलाई (रविवार) को आयोजित होगा, जिसमें एक बार फिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा