उच्चाधिकार समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी अपनी रिपोर्ट
इटानगर, 08 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (एपीएफआरए), 1978 के मसौदा नियमों पर गठित उच्चाधिकार समिति ने अपने अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद कटाके के नेतृत्व में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को
समिति ने अपने रिपोर्ट सरकार को आधिकारिक तौर पर सौंपा


इटानगर, 08 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (एपीएफआरए), 1978 के मसौदा नियमों पर गठित उच्चाधिकार समिति ने अपने अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद कटाके के नेतृत्व में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को अपनी रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सौंप दी है।

मुख्यमंत्री खांडू ने समिति के सभी सदस्यों के अथक परिश्रम, प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने मंत्री मामा नाटुंग, मंत्री बालो राजा और मंत्री केंटो जिनी को इस पूरी प्रक्रिया मंा उनके नेतृत्व और बहुमूल्य योगदान के लिए विशेष धन्यवाद दिया।

इसी बीच, अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी आस्था और सांस्कृतिक संस्था (आईएफसीएसएपी) ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उच्चाधिकार समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 (एपीएफआरए) के तहत नियमों को शीघ्र अधिसूचित किया जाए।

आईएफसीएसएपी ने एक बयान में पुष्टि की कि एपीएफआरए के तहत नियमों के निर्माण और कार्यान्वयन से संबंधित समिति की रिपोर्ट अरुणाचल प्रदेश सरकार को आधिकारिक तौर पर सौंप दी गई है। संगठन ने राज्य सरकार और समिति दोनों की व्यापक परामर्श प्रक्रिया के लिए सराहना व्यक्त की, जिसमें हितधारकों से परामर्श किया गया था। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक, पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया बताया।

संगठन ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह सिफारिशों की जांच करे और कानूनी एवं संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप उचित समय सीमा के भीतर नियमों को अधिसूचित करे। संगठन ने अधिकारियों से गौहाटी उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए शीघ्रता से कार्रवाई करने का आग्रह किया।

संगठन ने यह भी कहा कि वह कार्यान्वयन की प्रगति पर नजर रखना जारी रखेगा और न्यायालय के आदेश और वैधानिक ढांचे के उचित प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर कानूनी उपाय भी अपना सकता है।

अधिसूचना प्रक्रिया में देरी या बाधा डालने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी देते हुए संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक परामर्श संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि जन दबाव या टकराव के माध्यम से।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी