एमआरपी का मायाजाल: आखिर उपभोक्ता कब तक लुटता रहेगा?
-संगीता शर्मा बाजार में बिकने वाली लगभग हर वस्तु पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था अब कई सवालों के घेरे में है, विशेषकर दवाइयों और रोजमर्रा के उपयोग

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