Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

नई दिल्ली, 31 मई (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने मौजूदा साल के दौरान सिर्फ फरवरी को छोड़ कर बिकवाली का सिलसिला अभी तक लगातार जारी रखा है। मई में भी घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक स्टॉक मार्केट में बिकवाली करके लगभग 33 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है।
04 मई से 29 मई तक के कारोबारी माह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने स्टॉक मार्केट में कुल 32,963 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है। मई के महीने में हुई बिकवाली के आंकड़ों को मिला दिया जाए, तो कैलेंडर ईयर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा घरेलू शेयर बाजार में की गई शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा 2.25 लाख करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार यदि फरवरी में की गई खरीदारी के आंकड़ों को छोड़ दें तो शेष चार महीने मतलब जनवरी, मार्च, अप्रैल और मई में एफपीआई ने घरेलू शेयर बाजार में कुल 2,46,772 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। जनवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में 35,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। फरवरी में एफपीआई ने बिकवाली की जगह लिवाली पर जोर दिया। इस महीने इन्होंने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया।
मार्च के महीने में एक बार फिर स्थिति बदल गई। इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने स्टॉक मार्केट में लगातार चौतरफा बिकवाली कर रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में भी एफपीआई की ओर से हो रही बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 60,847 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। अब मई के महीने में भी एफपीआई ने स्टॉक मार्केट में 32,963 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा की गई 22,615 करोड़ रुपये की लिवाली को इस साल की गई कुल बिकवाली के आंकड़े से यदि घटा भी दिया जाए, तब भी इस साल विदेशी निवेशकों द्वारा की गई शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा ढाई लाख करोड़ के स्तर के काफी करीब 2,24,157 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा हुआ नजर आता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू शेयर बाजार में की जा रही बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक अनसर्टेनिटी है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से भारत समेत उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। विदेशी निवेशक जियो पोलिटिकल रिस्क, महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और ब्याज दरों को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी भी लगातार बनी हुई है। पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के ऊपर ही है। इसकी वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है। महंगाई के डर ने भी विदेशी निवेशकों को अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए भी बिकवाली का तरीका अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक