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कठुआ, 26 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 45वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने जिज्ञासुओं एवं आमजन को वेदों के अनुसार जीवन जीने का मार्ग बताया।
उन्होंने कहा कि ईश्वर, प्रकृति और जीवन की समस्याओं का समाधान पाने के लिए मनुष्य को वेदों के ज्ञाता, इन्द्रिय संयमी एवं तपस्वी विद्वानों के सानिध्य में रहकर प्रश्न करना चाहिए। विद्वान वेदों के अनुसार उत्तर देकर अज्ञान और भ्रम को दूर करते हैं तथा ज्ञान का प्रकाश करते हैं।
स्वामी जी ने यजुर्वेद मंत्र 23/9 का उदाहरण देते हुए बताया कि वेदों में प्रश्न पूछने और उनके उत्तर देने की विधि स्पष्ट की गई है। उन्होंने बताया कि सूर्य अकेला चलता है, चन्द्रमा पुनः उत्पन्न होता है, अग्नि ठंड की औषधि है और भूमि बीज बोने का श्रेष्ठ क्षेत्र है। उन्होंने वर्षा को प्रथम स्मृति का विषय बताते हुए कहा कि अन्न और जीवन का आधार वर्षा ही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में प्रश्नोत्तर की परंपरा भी वेदों से ही प्रेरित है। यदि जिज्ञासु प्रश्न नहीं करेगा तो वह अज्ञानी ही रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति प्रश्नों का उत्तर न दे सके, वह सच्चा विद्वान नहीं कहलाता।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया