डॉ. सत्यवान सौरभ
एक समय था जब भारतीय घरों, आंगनों, चौपालों और खेतों में लकड़ी की खाट या चारपाई जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी। सुबह की चाय से लेकर रात की नींद तक, खाट केवल एक फर्नीचर नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जीवन का केंद्र थ
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