Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जम्मू 20 मई (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने देशव्यापी आर्थिक आत्मरक्षा के आह्वान और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं के मद्देनजर कई प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं जिनमें वर्चुअल सुनवाई को प्रोत्साहित करना, अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) सुविधाओं को निलंबित करना और आधिकारिक गतिविधियों को ऑनलाइन स्थानांतरित करना शामिल है।
श्रीनगर स्थित रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार ये उपाय अगले आदेश तक लागू रहेंगे। परिपत्र में कहा गया है कि 21 मई, 2026 से उच्च न्यायालय ऑनलाइन कार्यवाही के लिए निर्धारित शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वर्चुअल सुनवाई और अधिवक्ताओं की वर्चुअल उपस्थिति को प्रोत्साहित करेगा।
इसमें आगे कहा गया है कि 8 जून, 2026 से शुरू होने वाली अदालती अवकाश अवधि के दौरान मनोनीत अवकाश पीठें वर्चुअल माध्यम से मामलों की सुनवाई करेंगी। हालांकि अपरिहार्य कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लेने में असमर्थ अधिवक्ता अदालतों के भौतिक रूप से कार्य करने पर शारीरिक रूप से उपस्थित हो सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक जिलों में कोई भी भौतिक प्रशासनिक निरीक्षण या दौरा नहीं किया जाएगा और सभी प्रशासनिक बैठकें ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाएंगी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में न्यायिक अधिकारियों और उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के लिए उन लोगों को छोड़कर जिन्हें पहले ही यह सुविधा मिल चुकी है, दीर्घकालिक देखभाल (एलटीसी) सुविधा अगले आदेश तक निलंबित कर दी गई है।
परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि एलटीसी ब्लॉक अवधि को हर उस महीने के लिए एक महीने बढ़ा दिया जाएगा जिस महीने यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि न्यायिक अकादमी कोई भी भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगी। सभी प्रशिक्षण सत्र, कार्यशालाएं, मार्गदर्शन और संबंधित शैक्षणिक गतिविधियां अब केवल ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री के अधिकारियों को ईंधन की खपत को कम करने और सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जहां भी संभव हो परिवहन सुविधाओं को साझा करने के लिए कहा गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता