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धर्मशाला, 09 जनवरी (हि.स.)। जिला कांगड़ा के तहत गग्गल क्षेत्र के एक युवक ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी और म्यांमार में बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड करवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव इच्छी के निवासी प्रवीण कुमार ने थाना गग्गल में अश्वनी कुमार (बिलासपुर), बरयाम सिंह और राहुल (जवाली) के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करवाई है।
पीड़ित प्रवीण कुमार, जो पूर्व में दुबई में स्टोरकीपर रह चुका है, ने बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में उसने एक विज्ञापन के माध्यम से आरोपियों से संपर्क किया था। आरोपियों ने उसे दुबई या थाईलैंड में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। गग्गल के एक होटल में करीब 15 लोगों का प्रारंभिक विवरण लेने के बाद आरोपियों ने प्रवीण से विभिन्न किश्तों में करीब 53 हजार रुपये वसूले। कुल मिलाकर इस पूरी धोखाधड़ी में पीड़ित का करीब 1.25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रवीण और उसके एक साथी राहुल (नूरपुर) को जबरन अमृतसर से थाईलैंड की फ्लाइट में बिठा दिया। वहां पहुंचते ही उन्हें एजेंटों के हवाले कर दिया गया, जो उन्हें छुपते-छुपाते नाव के जरिए म्यांमार ले गए। वहां उन्हें केके पार्ट 1' नामक कंपनी में ले जाया गया। तीन महीने तक उन्हें जबरन क्रिप्टो करेंसी इन्वेस्टमेंट और साइबर फ्रॉड की ट्रेनिंग दी गई। जब पीड़ितों ने यह गलत काम करने से मना किया, तो उन्हें जेल भेजने, पैसे की रिकवरी करने और जान से मारने की धमकियां दी गईं।
प्रवीण ने बताया कि वहां के हालात बेहद खौफनाक थे और उन्हें खाना तक नसीब नहीं होता था। उन्होंने किसी तरह भारतीय दूतावास को ईमेल के जरिए अपनी स्थिति बताई। म्यांमार सेना के हस्तक्षेप और थाईलैंड बॉर्डर पर पैदल पहुंचने के बाद उन्हें थाई इमिग्रेशन ने डिटेंशन सेंटर में रखा। अंततः भारतीय दूतावास के प्रयासों और नए पासपोर्ट जारी होने के बाद, सितंबर 2025 में उनकी भारत वापसी संभव हो सकी।
पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उसे और उसके साथियों को जानबूझकर साइबर अपराध के जाल में फंसाने और उनकी जान जोखिम में डालने की कोशिश की गई है। प्रवीण ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि धोखाधड़ी करने वाले तीनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई और युवा इस तरह के जॉब स्कैम का शिकार न हो।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया