तृणमूल शहीद दिवस मना रही थी, छात्र मांग रहे थे शिक्षक : शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, 08 जनवरी (हि.स.)। जिले के नेताई में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की ओर से शहीद दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को लेकर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी


कोलकाता, 08 जनवरी (हि.स.)। जिले के नेताई में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की ओर से शहीद दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को लेकर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में ऐसे तृणमूल नेता मौजूद थे, जिन्हें नेताई के इतिहास और भूगोल की कोई जानकारी नहीं है।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिस समय तृणमूल कांग्रेस शहीद दिवस मना रही थी, उसी समय नेताई के छात्र-छात्राएं अपने स्कूल में शिक्षकों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्कूल में गणित, अंग्रेज़ी, भौतिक विज्ञान समेत कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्षों से टेट परीक्षा के जरिए नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण ग्रामीण इलाकों के वे छात्र-छात्राएं, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं, शिक्षक अभाव के चलते शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल नेताओं द्वारा बार-बार अदालत को जिम्मेदार ठहराने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि यह सच्चाई को छिपाने की कोशिश है। उनके अनुसार, पूरे देश को अब यह पता चल चुका है कि तृणमूल शासन में नौकरी घोटाले हुए हैं और अयोग्य शिक्षकों की पैसों के बदले नियुक्ति के कारण अदालत के आदेश पर 26 हजार शिक्षकों की नौकरी रद्द हुई है।

अपने पोस्ट के अंत में शुभेंदु अधिकारी ने नेताई के छात्र-छात्राओं के विरोध प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह इस साहसी आंदोलन को सलाम करते हैं और नेताई की धरती ने आज भी अपनी विरोध की परंपरा को जीवित रखा है। शुभेंदु अधिकारी ने लिखा, “विरोध प्रदर्शन का दूसरा नाम ही नेताई है।”

नेता प्रतिपक्ष के इस पोस्ट के बाद एक बार फिर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय