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हुगली, 09 जनवरी (हि. स.)। चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल के बीच शुक्रवार को जनता उन्नयन पार्टी के चेयरमैन और तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर का फुरफुरा शरीफ दौरा राजनीति के केंद्र में आ गया है। दक्षिण बंगाल के अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर उनके इस दौरे को लेकर राजनीतिक महकमे में चर्चाओं का दौर तेज़ है।
सूत्रों के मुताबिक, हुमायूं कबीर शुक्रवार को फुरफुरा शरीफ पहुंचकर पीरजादा तोहा सिद्दीकी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके साथ ही इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के संस्थापक अब्बास सिद्दीकी से भी उनकी संभावित भेंट की अटकलें लगाई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार हुमायूं कबीर जुम्मे की नमाज़ अदा करने के बाद जनसंपर्क अभियान भी चला सकते हैं। हालांकि, इस पूरे कार्यक्रम को लेकर अभी तक न तो हुमायूं कबीर और न ही फुरफुरा शरीफ से जुड़े किसी प्रमुख व्यक्ति की ओर से आधिकारिक पुष्टि की गई है।
उल्लेखनीय है कि तोहा सिद्दीकी को तृणमूल कांग्रेस के काफ़ी करीब माना जाता रहा है। वहीं, वे पहले हुमायूं कबीर की राजनीति में धर्म के इस्तेमाल को लेकर खुलकर सवाल भी उठा चुके हैं। ऐसे में चुनाव से पहले दोनों के बीच संभावित मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।
हुमायूं कबीर हाल के दिनों में अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। अपनी अलग पार्टी बनाकर उन्होंने खुद को एक वैकल्पिक ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश शुरू की है। बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से लेकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नमाज़ जैसे बयानों ने अल्पसंख्यक वोट बैंक को लेकर उनकी रणनीति को और स्पष्ट किया है।
पिछली जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की कुल आबादी का लगभग 27 से 30 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम समुदाय का है। विधानसभा की करीब 90 से अधिक सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिनमें से अधिकांश दक्षिण बंगाल में स्थित हैं। हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे ज़िलों में फुरफुरा शरीफ का खासा प्रभाव माना जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय