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-सीमांत क्षेत्रों में सामुदायिक और अवसंरचनात्मक विकास पर सरकार का फोकस: मुख्यमंत्री
देहरादून, 07 जनवरी (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने सीमावर्ती गांवों के नागरिकाें काे राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सीमाई सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं।
राज्यपाल बुधवार काे क्लेमेंट टाउन में आयोजित संगोष्ठी “फोर्टिफाइंग द हिमालयाज: ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल-सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडल सेक्टर” को संबोधित कर रहे थे। उन्हाेंने ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जो सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या स्थिरता और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं। राज्यपाल ने हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा को केवल सैन्य तैयारियों तक सीमित नहीं माना और कहा कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे-जोन गतिविधियां और द्वि-उपयोगी आधारभूत संरचना जैसी चुनौतियों के मद्देनजर सैन्य, प्रशासन और स्थानीय समाज के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है। उन्होंने चारधाम परियोजना और आधारभूत संरचना जैसे सड़कों, पुलों और दूरसंचार की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये सुरक्षा और रणनीतिक गतिशीलता के लिए अनिवार्य घटक हैं।
इसके अलावा राज्यपाल ने आधुनिक तकनीक, जैसे ड्रोन, उन्नत निगरानी प्रणाली और एआई आधारित प्लेटफॉर्म की भूमिका को रेखांकित किया, लेकिन कहा कि तकनीक नेतृत्व और संस्थागत मजबूती का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के साथ संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया और कहा कि हिमालयी सीमाओं की वास्तविक शक्ति शांत तैयारी, संस्थागत समन्वय और सामाजिक विश्वास में निहित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण और सैन्य–नागरिक समन्वय पर सेमिनार का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार से प्राप्त सुझाव हिमालयी क्षेत्र की सामरिक नीति को मजबूत बनाने और विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे। धामी ने सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा में “आँख और कान” बताते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों के विकास और सशक्तिकरण का महत्व बताया। उन्होंने माणा गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इसे देश का प्रथम और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण गांव माना। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र के बॉर्डर की चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण और तकनीक के अपग्रेडेशन के साथ ही अवसंरचनात्मक विकास के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त),ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित संबंधित उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार