धमतरी : जिले में हो रही ऑयल पाम की खेती
धमतरी, 07 जनवरी (हि.स.)। जिले में खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने तथा कृषकों की आय में दीर्घकालीन वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल–ऑयल
ऑयल पाम की खेती का निरीक्षण करते हुए प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी व ग्रामीण।


धमतरी, 07 जनवरी (हि.स.)। जिले में खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने तथा कृषकों की आय में दीर्घकालीन वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल–ऑयल पाम (NMEO-OP) योजना अंतर्गत ऑयल पाम रोपण को व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त अनुदान के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में अतिरिक्त (टॉप-अप) अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे कृषकों को आर्थिक संबल एवं जोखिम से सुरक्षा मिल सके। ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम लागत वाली एवं अत्यधिक उत्पादक फसल है, जिसमें रोग प्रकोप की संभावना न्यूनतम रहती है तथा एक बार रोपण के पश्चात चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ होकर 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज प्राप्त होती है। यह फसल पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे कृषकों को स्थायी एवं सुनिश्चित आय का स्रोत प्राप्त होता है। जिले के कृषकों को ऑयल पाम खेती अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस फसल के प्रति कृषकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।

उप संचालक उद्यानिकी पूजा कश्यप साहू ने बताया कि, ऑयल पाम की अधिक प्रारंभिक लागत एवं 3 से 4 वर्ष की गैर-उत्पादक अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार के न्यूनतम 1.30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान की व्यवस्था की गई है, जिससे कृषकों को प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक राहत मिल सके। राज्य शासन द्वारा ऑयल पाम रोपण करने वाले कृषकों को रखरखाव मद में 6,750 रुपये प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसलों हेतु 10,250 रुपये प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई अपनाने पर 22,765 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा फेंसिंग (पशु सुरक्षा) हेतु 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार रखरखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रिप सिंचाई एवं फेंसिंग मद में कुल 69,620 रुपये तक का अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना न केवल कृषकों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि जिले एवं राज्य को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से अग्रसर कर रही है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन एवं रोपण सहायता हेतु कृषक उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों अथवा अधिकृत प्रतिनिधि कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं। यदि चाहें तो इसे एकदम सिंगल-पैरा अख़बार कटिंग, संक्षिप्त संस्करण, या कैपिटल हेडलाइन में भी तैयार कर सकता हूँ।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा