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रायपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत मिल चुकी है, वहीं इसी मामले में आरोपित पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में हैं। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने जेल जाकर कवासी लखमा से मुलाकात की है। चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी चरम पर है।
भूपेश बघेल के सेंट्रल जेल जाकर लखमा से मुलाकात पर उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने बुधवार काे बयान देते हुए कवासी लखमा को ''निर्दोष आदिवासी नेता'' बताया। साव ने कहा कि उनके साथ जिस तरह का अन्याय हुआ, उसे पूरी छत्तीसगढ़ की जनता ने देखा है।
अरुण साव ने कहा कि जेल में कवासी लखमा से मिलना, भूपेश बघेल का व्यक्तिगत निर्णय है और उन्हें मिलना भी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बेटे को जमानत मिल गई है, लेकिन जिस निर्दोष आदिवासी नेता के साथ अन्याय हुआ है, उसकी सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने है।
कवासी लखमा सुकमा जिले की कोंटा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं
कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र से कांग्रेस के सबसे मजबूत आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाले लखमा बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। साल 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन चुनिंदा नेताओं में थे, जो जीवित बच पाए थे। उन्होंने कोंटा सीट पर सीपीआई के कद्दावर नेता मनीष कुंजाम को लगातार पांच बार हराया।
2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री बनाया गया था। उस वक्त उनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर सवाल उठे थे, जिस पर लखमा ने कहा था कि भगवान ने उन्हें दिमाग दिया है और वे वंचितों-गरीबों के लिए काम करेंगे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के जिन चार मंत्रियों ने अपनी सीट बचाई थी, उनमें कवासी लखमा भी शामिल थे।
ईडी की कार्रवाई और 72 करोड़ का आरोप
ईडी ने दिसंबर 2024 में शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा के घर पर छापा मारा था। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि लखमा ने 72 करोड़ रुपये जमा किए थे और इन्हीं पैसों से उनके बेटे ने आलीशान मकान बनवाया। इस पर लखमा ने मीडिया से कहा था कि वे अनपढ़ हैं और उन्हें नहीं पता कि उनसे किन कागजों पर साइन कराए गए। उन्होंने दावा किया था कि सामने जो दस्तावेज आए, वे सह-आरोपित अरुणपति त्रिपाठी के थे और उन्होंने बस हस्ताक्षर कर दिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल