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जोधपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। शहर में बड़ी औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के नाम पर रंगाई-छपाई का काम करने वाले हस्तशिल्पी मजदूरों की आजीविका पर संकट आ गया है। ये मजदूर, जो राजस्थान की पारंपरिक पोशाकों और परिधानों में अपनी कला का रंग भरने के लिए प्रसिद्ध हैं, अब नगर निगम और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा लागू किए गए नियमों और कानूनों के चलते बेरोजगार हो सकते हैं। नगर निगम और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने विभिन्न नियमों और न्यायिक आदेशों की गलत व्याख्या करते हुए इन कारीगरों का रोजगार बंद करने का आदेश दिया है, जिससे उनके परिवारों की रोजी-रोटी संकट में पड़ गई है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने रंगरेज समाज के साथ मिलकर एक पैदल मार्च निकाला और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि इस कदम से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है और यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे कड़ी लड़ाई जारी रखेंगे। रंगरेज समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस मामले में स्थानीय कारीगरों के हितों को नजरअंदाज किया और केवल औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण के नाम पर उनके रोजगार को खत्म करने का कदम उठाया। ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस के शहर जिलध्यक्ष ओमकार वर्मा, पूर्व राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी, पूर्व महापौर कुंती परिहार, पूर्व विधायक मनीषा पंवार सहित कई कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश