माघ मेला में त्रिवेणी तट पर पूजन के साथ शुरू हुई प्रयाग की पंचकोसी परिक्रमा
--556 वर्ष पहले मुगल शासक अकबर ने लगाई थी पंचकोसी परिक्रमा पर रोक, योगी सरकार ने 2019 में किया पुनर्जीवित --अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और अखाड़ों के प्रमुख प्रतिनिधियों की अगुवाई में हुई परिक्रमा की शुरुआत --प्रयाग की सनातन परम्परा, आस्था एवं सांस्कृ
पूजन करते


--556 वर्ष पहले मुगल शासक अकबर ने लगाई थी पंचकोसी परिक्रमा पर रोक, योगी सरकार ने 2019 में किया पुनर्जीवित

--अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और अखाड़ों के प्रमुख प्रतिनिधियों की अगुवाई में हुई परिक्रमा की शुरुआत

--प्रयाग की सनातन परम्परा, आस्था एवं सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है पंच कोसी परिक्रमा

प्रयागराज, 05 जनवरी (हि.स.)। प्रयाग की सनातन परम्परा, आस्था एवं सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक पंचकोसी परिक्रमा की माघ मेला में शुरुआत हो गई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की अगुवाई में संगम में गंगा पूजन से इसकी शुरुआत सोमवार को हुई।

यह पंचकोसीय परिक्रमा पांच दिनों तक चलेगी जिसमें आखिरी दिन साधु-संतों के लिए भंडारे का आयोजन होगा। माघ मेला प्रशासन को इस परिक्रमा के आयोजन में यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिली है। संगम में गंगा पूजन के बाद साधु संतों का समूह अक्षयवट और आदि शंकर विमान मण्डपम मंदिर भी गया। इसके उपरांत पहले दिन की परिक्रमा का समापन हो गया।

--क्यों होती है पंच कोसी परिक्रमापंच कोसी परिक्रमा प्रयाग की प्राचीन धार्मिक परम्परा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का कहना है कि इस परिक्रमा की परम्परा के पीछे प्रयागराज का वह क्षेत्रीय विस्तार है जिसके अनुसार प्रयाग मंडल पांच योजन और बीस कोस में विस्तृत है। गंगा यमुना और सरस्वती के यहाँ छह तट है जिन्हें मिलाकर तीन अन्तर्वेदियाँ बनाई गई हैं-अंतर्वेदी, मध्य वेदी और बहिर्वेदी। इन तीनों वेदियों में कई तीर्थ, उप तीर्थ और आश्रम हैं जिनकी परिक्रमा को पंचकोसी परिक्रमा के अन्दर शामिल किया गया है। प्रयाग आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों को इसकी परिक्रमा करनी चाहिए। क्योंकि इससे इनमें विराजमान सभी देवताओं, आश्रमों, मंदिरों, मठों और जलकुंडों के दर्शन से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है ।

--556 वर्ष पूर्व अकबर ने लगाई थी रोकदिव्य और भव्य माघ मेले के आयोजन में कई परम्पराएं शामिल हैं। जिसमें कल्पवास और पंचकोसी परिक्रमा भी शामिल है। परिक्रमा में शामिल हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी का कहना है कि पंचकोसी परम्परा आज से 556 साल पहले माघ मेले का अटूट हिस्सा थी। 556 साल पहले मुग़ल शासक अकबर ने इसे रोक दिया था। कई वर्षों के बाद साधु-संतों की मांग के बाद योगी सरकार की कोशिशों से पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत 2019 में हुई और अब यह परम्परा सतत चल रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र