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नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर को भारतीय आत्मा की शाश्वत घोषणा बताते हुए कहा कि हमारी महान संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत अनगिनत हमलों की साक्षी रही है। फिर भी, देशवासियों की सामूहिक शक्ति ने हमारी सांस्कृतिक धरोहर को हमेशा अक्षुण्ण रखा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में एक प्राचीन संस्कृत श्लोक का उदाहरण देते हुए गहरा संदेश दिया:
वनानि दहतो वह्नेः सखा भवति मारुतः।
स एव दीपनाशाय कृशे कस्यास्ति सौहृदम् ॥
इस श्लोक का अर्थ है: जंगल को जलाती आग का मित्र बन जाता है हवा, लेकिन वही हवा कमजोर दीपक की लौ को बुझा देती है। कौन ऐसी मित्रता करता है जो कमजोर समय में नुकसान पहुंचाए?
प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से समझाया कि नफरत और उन्माद कुछ पल के लिए विनाश कर सकते हैं, लेकिन शक्ति और विश्वास अनंत काल तक सृजन करते हैं। सोमनाथ मंदिर बार-बार विध्वंस के बावजूद पुनर्निर्मित होता रहा, जो भारतीय संस्कृति की अटूटता का प्रमाण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी