सरना धर्म में लौटे परिवार का महासभा ने पारंपरिक तरीके से किया स्वागत
पश्चिमी सिंहभूम, 05 जनवरी (हि.स.)। जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत मोंगरा पंचायत के हेस्सापी गांव में अपनी मूल पहचान और प्राकृतिक आस्था सरना धर्म में पुनः लौटे छह सदस्यीय परिवार का आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से पारंपरिक तरीके से स्वागत किय
सरना धर्म में लौटे परिवार का पारंपरिक रीति से स्वागत


सरना धर्म में लौटे परिवार का पारंपरिक रीति से स्वागत


पश्चिमी सिंहभूम, 05 जनवरी (हि.स.)। जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत मोंगरा पंचायत के हेस्सापी गांव में अपनी मूल पहचान और प्राकृतिक आस्था सरना धर्म में पुनः लौटे छह सदस्यीय परिवार का आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

स्वागत कार्यक्रम सोमवार को महासभा की अनुमंडल कमिटि, जगन्नाथपुर की ओर से आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और धर्म जागरूकता का संदेश दिया गया।

महासभा की केन्द्रीय कमिटि के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने किया। इस दौरान विश्वनाथ सिंकू, उनकी पत्नी नीतिमा सिंकू, पुत्री दशमति सिंकू, पुत्र जश्मन सिंकू, स्वरा सिंकू और स्टीफन सिंकू को पारंपरिक गमचा भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सरना परंपरा, आदिवासी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को लेकर चर्चा की गई।

मौके पर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने कहा कि आदिवासी हो समाज युवा महासभा लंबे समय से समाज के बीच भाषा, संस्कृति और सरना धर्म के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में यह देखा जा रहा है कि जो लोग किसी कारणवश अपनी मूल आस्था से दूर चले गए थे, लेकिन अब वे अपनी संस्कृति और परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। यह समाज के लिए सकारात्मक संकेत है और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमाण भी है।

उन्होंने बताया कि केन्द्रीय कमिटी के मार्गदर्शन में अनुमंडल स्तर पर लगातार गांव-गांव जाकर ऐसे परिवारों से संपर्क किया जा रहा है और उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में जगन्नाथपुर अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में भी इस तरह के स्वागत और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

युवा महासभा की अनुमंडल कमिटि की ओर से यह भी कहा गया कि गांव स्तर पर युवा वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता और पारंपरिक नेतृत्व मिलकर ऐसे लोगों को जागरूक कर रहे हैं, जो अपनी मूल संस्कृति और धर्म से भटक गए थे। हेस्सापी गांव में यह पहल ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से सफल हो सकी। इसके लिए ग्रामीण मुण्डा, दियुरी, युवा सामाजिक कार्यकर्तां और गांव के बुद्धिजीवियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष बलि लागुरी, ग्रामीण मुण्डा गुरुचरण सिंकू, दियुरि निर्मल सिंकू, युवा सामाजिक कार्यकर्ता अजय सिंकू, रेशमा सिंकू, मनोज सिंकू, आकाश सिंकू, मोहन सिंकू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। मौके पर सभी ने एक स्वर में सरना धर्म, आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक