हिमाचल में जल स्रोतों की सख्त निगरानी, हर 10 दिन में होगा जल स्रोतों का निरीक्षण
शिमला, 05 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जल शक्ति विभाग ने निगरानी और रोकथाम को और सख्त करने का फैसला किया है। सचिव जल शक्ति विभाग डॉ. अभिषेक जैन ने सभी फील्ड अधिकारियों को हर दस दिन में जल
हिमाचल में जल स्रोतों की सख्त निगरानी, हर 10 दिन में होगा जल स्रोतों का निरीक्षण


शिमला, 05 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जल शक्ति विभाग ने निगरानी और रोकथाम को और सख्त करने का फैसला किया है। सचिव जल शक्ति विभाग डॉ. अभिषेक जैन ने सभी फील्ड अधिकारियों को हर दस दिन में जल स्रोतों और भंडारण टैंकों का निरीक्षण करने तथा इसकी नियमित रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि अब “फिक्स इट लेटर” यानी बाद में सुधार करने की सोच छोड़कर समय रहते समस्याओं को रोकने पर ध्यान देना होगा।

शिमला में सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. जैन ने कहा कि समाज को पानी के महत्व को नए सिरे से समझने की जरूरत है। जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकार की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में विभाग की पेयजल योजनाओं के जीर्णोद्धार और मल निकासी संयंत्रों की नियमित निगरानी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के 17,632 गांवों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। जल गुणवत्ता की जांच के लिए प्रदेश में 72 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें जिला, उप-मंडल और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है।

डॉ. जैन ने ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, खंड रिसोर्स पर्सन और फील्ड स्टाफ को नालों, खड्डों, झरनों और अन्य जल स्रोतों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड टेस्ट किट के जरिए पानी की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने और सभी सफाई व सुधार कार्य 15 दिन के भीतर पूरे करने को कहा। साथ ही जल शोधन संयंत्रों और मल निकासी संयंत्रों की नियमित जांच कर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए।

उन्होंने जनता से भी जल स्रोतों की सुरक्षा में सहयोग की अपील की और कहा कि जरूरत पड़ने पर लोग स्वयं भी पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में दे सकते हैं। डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि स्रोत पर ही प्रदूषण को रोकना सबसे सस्ता और टिकाऊ समाधान है। पानी की पाइप लाइनों में रिसाव पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री स्वयं विभाग की पेयजल और अन्य योजनाओं की नियमित निगरानी कर रहे हैं।

इस मौके पर जल शक्ति विभाग की प्रमुख अभियंता अंजू शर्मा ने बताया कि दिसंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 2,16,382 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से केवल 5 नमूने ही मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा 1,71,250 नमूनों की जांच फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से की गई। विभाग ने ग्रामीण इलाकों में 21,392 पेयजल स्रोतों और 15,611 गांवों के पानी के नमूने जांचे हैं। साथ ही 18,784 पेयजल स्रोतों का स्वच्छता सर्वेक्षण भी किया गया, जिसमें ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर्स, फील्ड टीमें और ग्राम जल स्वच्छता समितियों की अहम भूमिका रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा