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उदयपुर, 5 जनवरी (हि.स.)। उदयपुर जिले में यूरिया खाद की गंभीर किल्लत से परेशान किसानों ने सोमवार को सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक अनूठा और व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय के बाहर गधों को फूलों की माला पहनाई, उन्हें गुलाब जामुन खिलाकर मुंह मीठा करवाया और खाद के एक बैग को ‘मृत’मानते हुए उसकी तस्वीर कुर्सी पर रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। किसानों ने शोक व्यक्त करने की शैली में विलाप करते हुए सरकार की खाद नीति और वितरण व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
किसानों का कहना था कि यह प्रदर्शन सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाने का प्रतीकात्मक प्रयास है। उनका आरोप है कि खाद की किल्लत के बीच अधिकारियों और दुकानदारों की मिलीभगत से खुलेआम कालाबाजारी हो रही है, जबकि प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा तय 277 रुपए प्रति बैग की दर के बावजूद किसानों से 450 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अधिकारियों की शह पर हो रहा है और कमीशन के लालच में किसानों का शोषण किया जा रहा है। पटेल ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त गोदामों में जहां 150 बैग पहुंचने चाहिए, वहां केवल 100 बैग भेजे जा रहे हैं, जबकि शेष खाद अन्य स्थानों पर भेजकर कालाबाजारी की जा रही है।
किसानों ने बताया कि नियमों के अनुसार एक पॉश मशीन से किसी किसान को अधिकतम 10 बैग खाद दी जा सकती है, लेकिन दुकानदार पॉश मशीन से पर्ची नहीं दे रहे हैं। इससे किसान को यह तक पता नहीं चल पाता कि उसके नाम से कितने बैग उठाए जा रहे हैं। कई मामलों में किसान को सिर्फ 2 बैग दिए जा रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में उसके नाम पर 10 बैग चढ़ा दिए जाते हैं। किसानों के मोबाइल पर खाद वितरण से संबंधित संदेश भी नहीं आ रहे हैं।
समिति के सह-संयोजक मदनलाल डांगी ने कहा कि अधिकारियों की शह पर खाद की कालाबाजारी हो रही है और अफसरों तक कमीशन पहुंच रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास कृषि भूमि, फसल क्षेत्र और संभावित उत्पादन का पूरा डेटा होने के बावजूद हर साल रबी और खरीफ सीजन में खाद की ऐसी समस्या क्यों खड़ी हो जाती है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
किसानों ने मांग की कि खाद वितरण की व्यवस्था भी राशन वितरण प्रणाली की तर्ज पर की जाए। इसके लिए एक पारदर्शी समिति गठित हो, हर खरीद पर पॉश मशीन से स्लिप अनिवार्य रूप से दी जाए और किसानों को उनकी कृषि भूमि के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जाए।
प्रदर्शन के बाद मेवाड़ किसान संघर्ष समिति ने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा। समिति ने बताया कि इससे पहले भी लगभग 20 दिन पूर्व जिला कलेक्टर और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया जा चुका है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र इस समस्या का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
गौरतलब है कि उदयपुर जिले में पिछले 40 से 45 दिनों से यूरिया खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। लंबी कतारों में लगने के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है। लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर डिमांड के मुकाबले केवल 50 फीसदी खाद ही उपलब्ध हो पा रही है। किसान चार बैग की मांग करते हैं, लेकिन उन्हें दो बैग ही दिए जा रहे हैं। इस स्थिति से जिले के 3 से 4 लाख से अधिक किसान प्रभावित हो रहे हैं। हाल ही में उदयपुर की कृषि मंडी में लॉटरी के जरिए खाद वितरण की नौबत तक आ चुकी है।
उदयपुर जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र लगभग 4,55,693 हेक्टेयर है, जिसमें से करीब 31.41 प्रतिशत क्षेत्र में खेती होती है। जिले की अधिकांश भूमि असिंचित है और मक्का, ज्वार, गेहूं, जौ, दालें और तिलहन प्रमुख फसलें हैं। गांवों में मक्का, सोयाबीन और उड़द की खेती व्यापक रूप से होती है, जिनमें मक्का सबसे प्रमुख फसल है। हर वर्ष लगभग 1.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बुवाई की जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता