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उज्जैन, 04 जनवरी (हि.स.)। हमारे वेद कल्पवृक्ष के समान है, जिनके आश्रय में रहने से ही व्यक्ति को चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति हो जाती है। साथ ही जहां वेदों का विधिवत अध्ययन होता है,वह भूमि तीर्थ के समान हो जाती है। यही वेद वचन है। यह बात रविवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित कल्पवल्ली समारोह में श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठशांकरवेदान्त दर्शनाचार्य स्वामी वीतरागानन्द सरस्वती महाराज (अध्यक्ष-उपनिषद् साधना लोकन्यास, उज्जैन) ने अध्यक्षीय भाषण में कही। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण संसार के कल्याण के उद्देश्य से ही उपनिषदों का प्रणयन हुआ है। उपनिषद ग्रन्थ सहिता ग्रंथों के अर्थ को स्पष्ट करते हैं। यह हमारी सनातन ज्ञान परम्परा है। इसक संरक्षण, संवर्धन प्रत्येक भारतीय का प्रकाम कर्तव्य होना चाहिए।
अकादमी के निदेशक डॉ. गोविन्द गन्धे ने कहा कि अकादमी का उद्देश्य हमारी सनातन परम्परा का रक्षण करना है। अन्यथा वर्तमान में वेदो की जो शाखाऐं उपलब्ध है, वे भी दुलर्भ हो सकती हैं। परकिय आक्रमणों के कारण हमारी इस परम्परा का बहुत नुकसान हुआ है, अब हमें सजग होना होगा। इस अवसर पर वेदमूर्ति चिदानन्द शास्त्री एवं सत्यम शुक्ला ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। प्रो. शैलेन्द्र पारासर, प्रो. पंकज चांदोरकर, वसन्त गुमास्ते उपस्थित थे। ऋग्वेद तथा अथर्ववेद का शाखा स्वाध्याय हुआ। इसके अन्तर्गत ऋग्वेद का काशी पधती (महाराष्ट्र पधती) एवं श्रृंगेरी पधती से पद पाठ किया गया। प्रारंभ में संहिता पद क्रमपाठ, जटापाठ तथा घनपाठ किया गया।
कल्पवल्ली समारोह में महाराष्ट्र के पुणे, नाशिक, मुंबई, नांदेड़, जालना, सोलपुर आदि शहरों से तथा हैदराबाद, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखण्ड, असम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, तमीलनाडु, बिहार, तथा मध्यप्रदेश के वैदिक विद्वान वेदपाठ करेंगे। संचालन डॉ. गोपालकृष्ण शुक्ल ने किया। शाखास्वाध्याय का संचालन चिदानन्द शास्त्री ने किया। सोमवार प्रात: 11.30 बजे सामवेद की राणायनी, जैमिनी शाखा एवं अपराह्न 3.30 बजे शुक्ल यजुर्वेदे तथा कृष्ण यजुर्वेद की शाखाओं का स्वाध्याय होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल