धारः शहर की 14 बस्तियों में एक साथ हुए हिंदू सम्मेलन, शहर बना सांस्कृतिक जागरण का साक्षी
धार, 04 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को मध्य प्रदेश के धार नगर ने इतिहास रच दिया। शहर की 14 बस्तियों में एक साथ आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन ने यह सिद्ध कर दिया कि धार की सामाजिक चेतना, संगठन शक्ति और सांस्
राधे राधे बाबा संबोधित करते हुए


उपस्थित जन समुदाय


धार, 04 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को मध्य प्रदेश के धार नगर ने इतिहास रच दिया। शहर की 14 बस्तियों में एक साथ आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन ने यह सिद्ध कर दिया कि धार की सामाजिक चेतना, संगठन शक्ति और सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। पिछले 100 वर्षों में पहली बार ऐसा विराट दृश्य देखने को मिला, जब हजारों हिंदू परिवार एक साथ जुटे और पूरा नगर हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव के रंग में रंग गया।

सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का जीवंत मंच

सम्मेलनों में शहरी क्षेत्रों के हजारों परिवारों की उपस्थिति ने इसे केवल आयोजन नहीं, बल्कि समाज जागरण का महाअभियान बना दिया। प्रबुद्ध नागरिकों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, समाज के प्रतिष्ठित जनों एवं साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और ऊंचाई दी। वक्ताओं ने समाज की एकता, राष्ट्र निर्माण में हिन्दू समाज की भूमिका, सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण, परिवार संस्था की मजबूती, सेवा कार्य, युवा पीढ़ी में राष्ट्रभाव और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

सामूहिक सहभागिता ने दिया एकता का संदेश

सम्मेलनों में विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और बालक-बालिकाओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि आने वाली पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर ही सशक्त और संगठित समाज का निर्माण संभव है।

व्यवस्थित आयोजन, अनुशासन बना पहचान

आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रत्येक बस्ती में अलग-अलग समितियां गठित की गई थीं। स्वागत, मंच संचालन, जलपान, बैठक व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात—हर स्तर पर अनुशासन और व्यवस्थापन संघ की कार्यशैली को दर्शाता रहा था। पूरे शहर में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा और नागरिकों ने स्वस्फूर्त सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक बना दिया।

महिला सहभागिता ने सम्मेलन को दी विशेष पहचान

हिंदू सम्मेलनों में महिला सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने न केवल उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई, बल्कि विचार, संकल्प और कार्ययोजना के स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। महिला वक्ताओं के उद्बोधन में परिवार संस्था की मजबूती, बच्चों में संस्कार निर्माण, सामाजिक समरसता और सेवा भाव को जीवन का अंग बनाने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि संस्कारवान समाज की नींव घर से ही पड़ती है और इसमें महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती है। महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में नारी शक्ति अग्रणी भूमिका निभा रही है।

दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले व्यवहारिक बदलाव ‘पंच परिवर्तन’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित हिंदू सम्मेलनों में ‘पंच परिवर्तन’ को समाज परिवर्तन का मूल मंत्र बताया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन केवल विचारधारा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले व्यवहारिक बदलाव हैं, जिनसे सशक्त और संगठित समाज का निर्माण होता है।

1. स्वावलंबन

अपने परिवार और समाज की आवश्यकताओं के लिए स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भर सोच को अपनाना।

2. कुटुंब प्रबोधन

परिवार को संस्कार, संवाद और जिम्मेदारी का केंद्र बनाते हुए बच्चों और युवाओं को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ना।

3. सामाजिक समरसता

जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों के साथ समान भाव से जुड़ना और सहयोग बढ़ाना।

4. पर्यावरण संरक्षण

प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व निभाते हुए जल, वन, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन के लिए सामूहिक प्रयास करना।

5. नागरिक कर्तव्य

अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाना।

वक्ताओं ने कहा कि यदि पंच परिवर्तन को व्यक्ति, परिवार और समाज के स्तर पर अपनाया जाए, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया स्वतः सशक्त हो जाती है।

14 बस्तियों में मिला संतों का सानिध्य व मुख्य वक्ताओं को मार्गदर्शन

-वीर तेजाजी बस्ती में मुख्य वक्ता अरविंद चौधरी रहे, जहां संत नृसिंह दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। राजा भोज बस्ती में राहुल डोडिया मुख्य वक्ता थे तथा संत आचार्य गणेश जी उपस्थित रहे। पंडित दीनदयाल बस्ती में महेश अग्रवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन दिया और संत हरिहरानंद महाराज का सानिध्य मिला। महाराणा प्रताप बस्ती में मुख्य वक्ता अभिषेक गुप्ता रहे, जहां दंडी स्वामी का सानिध्य प्राप्त हुआ। त्रिमूर्ति बस्ती में रघुवीर सिंह सिसोदिया मुख्य वक्ता थे तथा चिन्मयानंद मिशन के संतश्री का सानिध्य रहा। वीर सावरकर बस्ती में बाबूलाल हामड़ मुख्य वक्ता रहे और संत गोपाल दास महाराज उपस्थित रहे। फड़के बस्ती में मृणाल दोराया मुख्य वक्ता थे तथा संत वासु श्रेष्ठजी का सानिध्य मिला। सुभाष बस्ती में विवेक निंबालकर मुख्य वक्ता रहे और संत श्रवण भारती उपस्थित रहे। विवेकानंद बस्ती में गोपाल डोड मुख्य वक्ता थे तथा संत मंगल दास त्यागी का सानिध्य प्राप्त हुआ। ज्योतिबा फुले बस्ती में भूपेंद्र कसेरा मुख्य वक्ता रहे और हर्षित मिश्रा उपस्थित रहे। मधुकर बस्ती में भूपेंद्र राठौड़ मुख्य वक्ता थे, जहां गुलाब कोकर्ण महाराज का सानिध्य मिला। गुरु गोविंद बस्ती में अंकित गजकेश्वर मुख्य वक्ता रहे और राधे-राधे महाराज उपस्थित रहे। नित्यानंद बस्ती में प्रेम चौधरी मुख्य वक्ता थे तथा गुणानंद महाराज का सानिध्य मिला। वहीं शिवाजी बस्ती में तरुण राठौड़ ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन दिया और स्वामी असंघनंद राघवेंद्र का सानिध्य प्राप्त हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi