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गुवाहाटी, 10 जनवरी (हि.स.)। राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से लागू मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) के तहत मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कामरूप जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में हाजो–सुवालकुची विधानसभा क्षेत्र की 31,190 उद्यमी महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता राशि के चेक वितरण की शुरुआत की। इस बीज पूंजी के वितरण के साथ अब तक राज्य की 74 विधानसभा सीटों में कुल 17,95,820 महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।
सुवालकुची के बालिचर स्थित श्री श्री माधवदेव क्षेत्र में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत राज्य की 32 लाख महिलाओं को 10,000 रुपये दिए जाएंगे, जिस पर कुल 3,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि पहले किसी भी सरकार ने विशेष रूप से निवेश नहीं की। इससे सदिया से धुबरी और जोनाई से सिलचर तक महिलाओं में उत्साह और आत्मविश्वास का वातावरण बना है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को महिलाओं के प्रति सरकार के सम्मान का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई अरुनोदोई योजना और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लागू निजुत मोइना योजना ने राज्य में सामाजिक-आर्थिक बदलाव की दिशा में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। इन तीन महिला-केंद्रित योजनाओं के माध्यम से एक ही वर्ष में असम की महिलाओं और छात्राओं के बैंक खातों में लगभग 9,000 करोड़ रुपये सीधे पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि हाजो–सुवालकुची विधानसभा क्षेत्र में अरुनोदोई के तहत पहले ही 28,946 लाभार्थियों को शामिल किया जा चुका है, जबकि अतिरिक्त 2,000 महिलाओं को जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 10,000 रुपये की उद्यमिता सहायता मिलने के बाद, अरुनोदोई की लाभार्थी महिलाओं को 20 फरवरी को पुनः 8,000 रुपये मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएमयूए के तहत 32 लाख लाभार्थियों में से अब तक एक लाख से अधिक महिलाएं अपनी मेहनत से ‘लखपति बाइदेव’ बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि नए हाजो–सुवालकुची विधानसभा क्षेत्र में ही 2,165 महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने क्षेत्र की सफल महिला उद्यमियों के उदाहरण देते हुए कहा कि बाथन गांव की सेउजी स्वयं सहायता समूह की डालिमी दास ने पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र में अपने परिवार की कुशल सिल्क फैक्ट्री का विस्तार कर पाट, मूगा और तसर की मेखला-चादरें बनानी शुरू की हैं और प्रतिमाह लगभग 30,000 रुपये कमा रही हैं। वहीं निज गांधामौ गांव की नवमिलन स्वयं सहायता समूह की उत्तरा बैश्य एकीकृत खेती और पशुपालन से सालाना 1.82 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दिए जा रहे 10,000 रुपये केवल शुरुआत हैं और सरकार का प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक महिलाएं लखपति बाइदेव नहीं बन जातीं। उन्होंने बताया कि यदि महिलाएं इस राशि को अपने स्वयं सहायता समूह में जमा करती हैं तो एक लाख रुपये का सामूहिक कोष तैयार किया जा सकता है, जिससे समूह उद्यम, व्यक्तिगत व्यवसाय या पारिवारिक कारोबार का विस्तार संभव है। लगभग छह महीने बाद सरकार इस राशि के उपयोग का मूल्यांकन करेगी और प्रभावी उपयोग करने वाली महिलाओं को क्रमशः 25,000 और फिर 50,000 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि महिला उद्यमियों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए सरकार बैंकों से सहयोग का आग्रह करेगी और समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुनोदोई, मुफ्त राशन, रसोई गैस सब्सिडी, मुफ्त दाखिला और निजुत मोइना जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार आम लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड धारकों को दाल, चीनी और नमक मात्र 100 रुपये में दिए जा रहे हैं और भविष्य में इन्हें मुफ्त करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि फरवरी से निजुत मोइना की तर्ज पर उच्च शिक्षा में लड़कों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री निजुत बाबू योजना शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सती जयमती और मुलागाभरू की धरती की बेटियां दृढ़ संकल्प लें तो उन्हें लखपति बाइदेव बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाला समाज हमेशा प्रगति करता है और उन्होंने एक बार फिर महिलाओं से उद्यमिता के मार्ग पर आगे बढ़कर मजबूत समाज और परिवर्तित असम के निर्माण का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में पर्यावरण एवं वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी, विधायक सुमन हरिप्रिया, असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक कुंतल मणि शर्मा बरदलै, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, विशिष्ट अतिथि तथा स्वयं सहायता समूहों की महिला लाभार्थियां उपस्थित रहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश