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रांची, 30 अगस्त (हि.स.)। श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में शनिवार को 894 वां खिचड़ी महाप्रसाद का भोग निवेदन हुआ।
इसके पूर्व भगवान् का विश्वरूप दर्शन, पांचरात्र आगम विधान से तिरूवाराधन और षोडषोपचार पूजा-अर्चना की गई।
शास्त्रों में जीव के लिये अन्न और जल से बढ़कर तृप्तिदायक कोई अन्य वस्तु नहीं है।
प्राणिमात्र के जीवन के लिये अन्न और जल ही मुख्यतया आधारभूत पदार्थ हैं। प्राणमय शरीर का निर्माता होने के कारण अन्न को ही पूर्ण कहा जाता है और 'ब्रह्म' की भी पूर्ण संज्ञा है, इसलिए शास्त्रकारों ने अन्य को ही 'प्रत्यक्ष ब्रह्म' माना है। अन्न के मिश्रण से सुपक्व खिचड़ी महाप्रसाद का भोग ब्रह्म अर्थात् श्रीमन्नारायण के भी प्रसन्नता को बढ़ानेवाला है। क्योंकि भगवान् को निवेदित महाप्रसाद अमृतत्व को प्राप्त कर ग्रहण करने वाले जीव को आयु, आरोग्य, तृप्ति, सुख और समृद्धि को देनेवाला होता है।
खिचड़ी महाप्रसाद अजीत और बबिता कुमारी एवं पीवर प्रसाद तथा नव्याश्री आंध्रप्रदेश निवासी की ओर से निवेदित किया गया।
अनुष्ठान की प्रक्रिया को अर्चक सत्यनारायण गौतम, गोपेश आचार्य और श्री नारायण दास ने पूरा कराया।
इस अवसर पर राम अवतार नरसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नरसरिया, रंजन सिंह, प्रभाष मित्तल, शंभू नाथ पोद्दार, सुशील लोहिया, सीता शर्मा, भोला बरनवाल सहित अन्य मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak