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अमरेली, 11 सितंबर (हि.स.)। गुजरात के अमरेली जिले के शेडुभार गांव में नेपियर घास और कृषि अवशेषों से बायो-सीएनजी बनाने के लिए ‘गोपीनाथ बायो सीएनजी एलएलपी’ का संयंत्र तैयार किया जा रहा है। परियोजना संचालकों के अनुसार, संयंत्र को करीब आठ महीने में शुरू करने का लक्ष्य है। इसमें प्रतिदिन 10 टन से अधिक बायो-सीएनजी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के संचालक शेडुभार निवासी जतीन मनसुखभाई गजेरा हैं। परियोजना के अनुसार, किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर और स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई है।
परियोजना के लिए क्षेत्र में करीब 1,000 बीघा जमीन पर नेपियर घास की खेती शुरू की गई है। किसान यह घास सीधे संयंत्र को बेच सकेंगे। एक बार खेती करने के बाद उचित देखभाल से कई वर्षों तक इसकी कटाई की जा सकती है। किसानों के लिए वर्ष में करीब 4 बार घास बेचने का अवसर रहेगा।
किसानों को घास काटकर संयंत्र तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी की मशीनरी खेत तक जाकर घास की कटाई और पैकिंग करेगी और उसे संयंत्र तक पहुंचाएगी। खेत से ही निर्धारित राशि का भुगतान करने की व्यवस्था रखने की बात कही गई है।
संयंत्र में नेपियर घास के साथ गेहूं और चने का भूसा, कपास तथा अरंडी के कृषि अवशेषों का भी उपयोग किया जाएगा। पहले इनसे बायोगैस तैयार होगी और उसके बाद बायो-सीएनजी बनाई जाएगी। संयंत्र में प्रतिदिन 10 टन से अधिक बायो-सीएनजी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। तैयार गैस की बिक्री सरकार को करने की योजना है।
बायो-सीएनजी बनाने के बाद बचने वाले अवशेष का उपयोग जैविक खाद के रूप में करने की योजना है। इससे कृषि अवशेष का दोबारा खेती में उपयोग हो सकेगा।
परियोजना से संयंत्र संचालन, कटाई, संग्रह, पैकिंग और परिवहन जैसे कामों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
परियोजना संचालकों के अनुसार, शेडुभार का संयंत्र सफल रहा तो अमरेली जिले में आगे 5 और बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
इस परियोजना से किसानों को नेपियर घास से अतिरिक्त आय, स्थानीय युवाओं को रोजगार और कृषि अवशेषों से स्वच्छ ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे