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जगदलपुर, 08 जुलाई (हि.स.)। बस्तर जिले के नानगुर विद्युत वितरण केंद्र (डीसी) के अंतर्गत आने वाले 55 गांवों की 213 किलोमीटर विद्युत व्यवस्था महज एक संविदा कर्मी और जरूरत पड़ने पर कभी-कभार बुलाए जाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कंधों पर टिकी हुई है। जबकि इन गांवों में करीब 10 हजार उपभोक्ता हैं।
तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी के कारण आपातकालीन फॉल्ट सुधारने और रख-रखाव में भारी समस्या आ रही है। इन दिनों आंधी-तूफान के चलते अक्सर लाइन में फॉल्ट आने से कई दिनाें तक बिजली गुल रहने की समस्या आम है। यह समस्या सिर्फ ग्रामीण क्षेत्राें में ही नही है, शहरी क्षेत्राें में भी विद्युत वितरण केंद्र की इससे अलग नही है, शहरी क्षेत्र में फर्क इतना ही है कि यहां दाे तीन घंटे के बाद आपातकालीन फॉल्ट सुधारने पंहुचते हैं।
विद्युत कंपनी ने नानगुर को विद्युत वितरण केन्द्र बनाया, पर अब तक कनिष्ठ अभियंता एवं कर्मचारियों को तैनात नहीं किया गया है। क्षेत्र में बारिश के दौरान रोज लगभग 70-80 फ्यूल कॉल दर्ज हो रहे हैं, जिनका निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है। ट्रांसफार्मर खराब होने या तार आदि टूटने पर तो घंटों क्या एक-दो दिन से ज्यादा भी बिजली आने का इंतजार करने पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में बिजली से संबंधित तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए लाइनमेन तैनात किए जाते हैं। लेकिन इन 55 गांवों में कोई लाइनमेन भी नहीं है।
विद्युत कंपनी जगदलपुर वृत के अधीक्षण अभियंता केवी मैथ्यू ने बताया कि रिक्त पदों की जानकारी उच्च कार्यालय को भेजा जाता है। मुख्यालय की ओर से रिक्त पदों पर अधिकारी एवं कर्मचारियों को पदस्थ किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे