आसनसोल : वकीलों पर दर्ज मामलों के विरोध में कोर्ट गेट पर अधिवक्ताओं का धरना
पश्चिम बर्दवान, 20 जुलाई (हि. स.)। आसनसोल बार एसोसिएशन की ओर से सोमवार को वकीलों के खिलाफ दर्ज मामलों के विरोध में कोर्ट परिसर में पेन डाउन आंदोलन किया गया। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना देकर पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर
अधिवक्ता धरने पर बैठे अधिवक्ता


पश्चिम बर्दवान, 20 जुलाई (हि. स.)। आसनसोल बार एसोसिएशन की ओर से सोमवार को वकीलों के खिलाफ दर्ज मामलों के विरोध में कोर्ट परिसर में पेन डाउन आंदोलन किया गया। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना देकर पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के कारण कोर्ट की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई और आरोपितों के प्रोडक्शन का काम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा ई-मेल के माध्यम से संपन्न कराया गया।

बार एसोसिएशन का आरोप है कि पिछले शुक्रवार को आसनसोल कोर्ट परिसर के अंदर अधिवक्ता नरेन साव के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी। इस घटना की शिकायत नरेन साव ने आसनसोल दक्षिण थाना में दर्ज कराई थी। वहीं, जिन लोगों पर मारपीट का आरोप लगाया गया, उन्होंने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने पीड़ित वकील की शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि दूसरी ओर दर्ज शिकायत के आधार पर नरेन साव सहित कई ऐसे अधिवक्ताओं के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया जो घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।

नरेन साव ने आरोप लगाया कि उनके बीमार भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया है।

इसी के विरोध में आसनसोल बार एसोसिएशन ने धरना प्रदर्शन का आह्वान किया।

अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयान मुखर्जी ने कहा कि यदि पुलिस अधिवक्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है तो आम लोगों के साथ क्या होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से वकीलों में भारी रोष है और बार एसोसिएशन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर कुंडू ने कहा कि बार एसोसिएशन ने आम नागरिकों के लिए कोर्ट का रास्ता बंद नहीं किया है। उनका विरोध केवल उन लोगों के खिलाफ है जो अधिवक्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले किसी अधिवक्ता के खिलाफ शिकायत आने पर पुलिस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव से चर्चा कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास करती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से बिना किसी संवाद के सीधे एफआईआर दर्ज की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति के सदस्यों समेत कई अधिवक्ताओं के खिलाफ भी बिना पर्याप्त जांच के मामले दर्ज किए गए।

पुलिस का कहना है कि बाद में फाइनल रिपोर्ट दे दी जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि जब पर्याप्त जांच नहीं हुई तो एफआईआर दर्ज क्यों की गई।

शेखर कुंडू ने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की भी लड़ाई लड़ते हैं। यदि किसी के अधिकारों का हनन होगा तो बार एसोसिएशन उसका विरोध करेगी। उन्होंने पुलिस की अति सक्रियता और कई मामलों में अति निष्क्रियता दोनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखा जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा