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कानपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। जीवन में सफलता और प्रसन्नता के लिए गति, कौशल और रणनीति तीनों का समन्वय आवश्यक है। माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है, जबकि स्वस्थ शरीर, श्रेष्ठ आचरण और सही रणनीति लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करती है। यह बातें स्वामी प्रबुद्धानंद ने मंगलवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में आयोजित 'आधुनिक युग में युवा शक्ति- सफलता एवं प्रसन्नता का मार्ग' विषयक व्याख्यान में कहीं।
विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में गीता शोधपीठ, दीनदयाल शोध केंद्र, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस और स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में विद्यार्थियों को जीवन में सफलता, सकारात्मक सोच और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्वामी प्रबुद्धानंद का स्वागत करते हुए भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी विभागों में वेदांत की कक्षाएं संचालित की जानी चाहिए।
व्याख्यान के दौरान स्वामी प्रबुद्धानंद ने 'तीन एस' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए गति, कौशल और रणनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद जीवन की अदृश्य शक्ति है, जो कठिन परिस्थितियों से उबरने में सहायक बनती है। साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य, आत्मबल और श्रेष्ठ आचरण को सफलता का आधार बताया।
इस अवसर पर गीता शोधपीठ के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, प्रो. डी.सी. श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार और डॉ. उमेश पालीवाल ने स्वामी प्रबुद्धानंद का अभिनंदन किया। स्वागत भाषण डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने दिया, जबकि चिन्मय मिशन के उपाध्यक्ष विनय सानन ने मुख्य वक्ता का परिचय कराया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनोज अवस्थी ने किया तथा अंत में गीता शोधपीठ के सह निदेशक अनिल गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अमरनाथ मानस उपाध्याय, डॉ. प्रशांत मिश्रा सहित शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप