बुनियादी सुविधाओं से वंचित रिफातपुर-सीमानपुर पंचायत का वंशीचक गांव
भागलपुर, 12 जुलाई (हि.स.)। जिले के पीरपैंती प्रखंड की रिफातपुर-सीमानपुर पंचायत का वंशीचक गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी करीब 800 की आबादी वाला यह गांव पक्की सड़क के लिए तरस रहा है। हालात ऐसे हैं कि हल
चचरी पुल से गुजरते ग्रामीण


भागलपुर, 12 जुलाई (हि.स.)।

जिले के पीरपैंती प्रखंड की रिफातपुर-सीमानपुर पंचायत का वंशीचक गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है।

आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी करीब 800 की आबादी वाला यह गांव पक्की सड़क के लिए तरस रहा है। हालात ऐसे हैं कि हल्की बारिश होते ही कच्चा रास्ता कीचड़ और जलजमाव में तब्दील हो जाता है।

स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पानी और कीचड़ पार कर विद्यालय जाना पड़ता है, जबकि बीमार पड़ने पर एंबुलेंस तो दूर, चारपहिया वाहन तक गांव में नहीं पहुंच पाता। मरीजों को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना ग्रामीणों की मजबूरी बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी खेतों की पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है।

रास्ते में दो जगह बांस की चचरी का अस्थायी पुल बना है, जो अक्सर टूट जाता है। पुल टूटने के बाद कोई सरकारी मदद नहीं मिलती, बल्कि गांव के लोग चंदा जुटाकर स्वयं उसकी मरम्मत कराते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर वर्षों से केवल आश्वासन मिला, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। बताया जाता है कि सड़क के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है, जबकि लोग वर्षों से गैरमजरुआ भूमि से होकर आवागमन करने को विवश हैं।

स्थानीय ग्रामीण विनय कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाता है। उन्होंने कहा, अगर कोई मरीज इलाज के लिए भागलपुर जाता है और देर रात लौटता है, तो कई बार घर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। रास्ते की बदहाली और अंधेरे के कारण लोग रेलवे स्टेशन या रिश्तेदारों के यहां रात गुजारने को मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। ग्रामीण रेनू देवी, पंकज यादव, मनोज कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, ललिता देवी, सुलेखा देवी, सोनू सिंह समेत दर्जनों लोगों ने कहा कि सड़क नहीं होने का असर गांव के सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि खराब रास्ते की वजह से लोग इस गांव में रिश्तेदारी करने से कतराते हैं। कई बार शादी-विवाह के रिश्ते केवल इसलिए टूट जाते हैं क्योंकि गांव तक पहुंचने का रास्ता नहीं है।

उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में गांव मानो टापू बन जाता है और बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज तथा रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, एसडीएम और संबंधित विभाग से अविलंब वंशीचक गांव तक पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी सरकार और प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो गांव के लोग आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का सवाल है कि जब देश डिजिटल और विकसित भारत की बात कर रहा है, तब आखिर वंशीचक जैसे गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से क्यों वंचित हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर