अदालत ने अजमेर दरगाह की दोनों अंजुमन संस्थाओं और दरगाह दीवान को प्रतिवादी माना
-नाै अर्जियां निरस्त, जुर्माना भी लगाया, अगली सुनवाई 22 जुलाई को अजमेर, 8 मई (हि.स.)। ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने के दावे पर शुक्रवार को सिविल न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने दरगाह दीवान सैयद जैन
Sankat Mochan Mahadev Temple Case at Ajmer Dargah: The court considered both the Dargah's Anjuman institutions and the Dargah Diwan as defendants, dismissed 9 applications and also imposed a fine.


-नाै अर्जियां निरस्त, जुर्माना भी लगाया, अगली सुनवाई 22 जुलाई को

अजमेर, 8 मई (हि.स.)। ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने के दावे पर शुक्रवार को सिविल न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन एवं दरगाह से जुड़ी खादिमों की दोनों अंजुमन संस्थाओं को प्रतिवादी के रूप में स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले में वादी के रूप में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह परमार की अर्जी को भी स्वीकार कर लिया है।

अदालत में इस प्रकरण में 12 अर्जियां वादी व प्रतिवादी बनने की लगाई गई थीं, जिसमें से अदालत ने 9 अर्जियों को सिरे से खारिज करते हुए उन पर गंभीर टिप्पणी के साथ प्रति अर्जी 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने टिप्पणी में कहा कि अदालत का समय खराब करने और झूठी ख्याति पाने के लिए अर्जी दाखिल की गईं। अदालत ने इन सभी 9 अर्जी दाखिल कर्ताओं को एक माह जुर्माना राशि जमा कराने का वक्त दिया है। अदालत अब इस मामले में 22 जुलाई को अगली सुनवाई करेगी।

महाराणा प्रताप सेना

के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजयवर्धन सिंह ने कहा कि वर्ष 2022 से वे इस लड़ाई को लड़ रहे हैं, उनका बहुत लोगों ने विरोध किया। आज अदालत ने उन्हें पक्षकार बना कर उनकी अर्जी पर मोहर लगाई है। उन्होंने कहा कि मामले में मुख्य पक्षकार के रूप में उन्हें जोड़े जाने से वे अब आगामी सुनवाई में वादी पक्ष की ओर से अहम भूमिका निभाएंगे। उनकी ओर से प्रकरण में अधिवक्ता एपी सिंह, अधिवक्ता निहाल सिंह शेखावत एवं अधिवक्ता विश्वराज सिंह राठौड़ पैरवी कर रहे हैं।

दूसरी ओर राष्ट्रीय हिन्दू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता ने अदालत के इस फैसले पर निराशा जाहिर की है। अधिवक्ता ने मीडिया से कहा कि अदालत ने जिन लोगों को प्रतिवादी बनाया है उन्होंने कोई साक्ष्य अर्जी पर प्रस्तुत नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में अब अपील न्यायालय में जाएंगे।

दरगाह की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने इसे सत्य की जीत बताया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि अदालत ने सही फैसला दिया है। दरगाह से जुड़े धार्मिक और पारम्परिक पक्षकारों को सुना ही जाना चाहिए। अदालत ने उन्हें प्रतिवादी बनाए जाने का सही फैसला किया है।

इस मामले में 2 मई को प्रस्तावित सुनवाई के दौरान खादिमों ने पक्षकार होने की अपील पेश की थी। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 6 मई निर्धारित कर दी। 6 मई को अदालत ने सुनवाई कर फैसला 8 मई के लिए सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अदालत के फैसले के बाद आगे जिरह-बहस संभव हो सकेगी और सर्वे का रास्ता प्रशस्त हो सकेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष