हृदयनारायण दीक्षित
हम सब सोचते हैं। अनेक प्रश्न उठते हैं। प्रश्न स्वयं को जानने का भी है। संसार और स्वयं का बोध जरूरी है। प्रश्न बड़ा है- कैसे जानें इस असीम संसार को। समझ छोटी अति अल्प और संसार बड़ा। प्रश्न और भी हैं। जैसे सृष्टि क्या है? सृष्टि का
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